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अपने अंदर की बुराइयों की आहुति ही वास्तविक हवन है – मुनि श्री प्रमाण सागर : रथयात्रा के साथ सम्पन्न हुआ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन


अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन भगवान जिनेन्द्र देव की भव्य रथयात्रा और हवन के साथ हुआ। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि वास्तविक हवन वह है जिसमें व्यक्ति अपनी बुराइयों की आहुति दे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…


अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में विगत आठ दिनों से चल रहे 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन जाप, हवन और भगवान जिनेन्द्र देव की भव्य रथयात्रा के साथ हुआ। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकाल भगवान जिनेन्द्र देव का अभिषेक, शांतिधारा और नित्यनियम पूजन के पश्चात मंत्रोच्चारण के साथ अग्निकुंड में आहुतियाँ दी गईं।

इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि “यदि श्रद्धा सच्ची है, तो व्यक्ति के भीतर की बुराइयाँ स्वयं मिट जाती हैं। केवल धुआँ उड़ाना हवन नहीं है, बल्कि अपनी बुराइयों और पापों की आहुति देना ही वास्तविक हवन है।” उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को स्वयं चिंतन करना चाहिए कि विधान के पहले उसके जीवन में क्या प्रवृत्तियाँ थीं और अब उनमें कितना परिवर्तन आया है।

मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक आयोजन से पुण्य का संचय और पाप का क्षय तो होता है, परंतु इसका वास्तविक मापदंड यह है कि इन दिनों में आपके भीतर कितनी भौतिक आकांक्षाएँ घटीं और कितनी आध्यात्मिक चेतना जागृत हुई। उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप कहा कि “भौतिकता के प्रति उदासीनता और भगवान के प्रति आराधना ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।”

कार्यक्रम के अंत में भगवान जिनेन्द्र देव की विशाल रथयात्रा निकाली गई, जिसमें जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। मंच पर मुनि श्री संधान सागर जी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक विराजमान रहे। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी अशोक भैया और ब्रह्मचारी अभय भैया ने किया।

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