मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश सिद्धवरकूट की ओर से हुआ। चातुर्मास समाप्ति के बाद इंदौर से मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज ससंघ सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट की वंदना करते हुए राजिम छत्तीसगढ़ की ओर अग्रसर हो रहे है। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावद। त्याग एवं तपस्वियों की नगरी में मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश सिद्धवरकूट की ओर से हुआ। चातुर्मास समाप्ति के बाद इंदौर से मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज ससंघ सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट की वंदना करते हुए राजिम छत्तीसगढ़ की ओर अग्रसर हो रहे है। नगर में सभी समाजजनों ने रेलवे गेट औंकारेश्वर रोड पर पहुंच कर मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज ससंघ अगवानी की एवं नगर में प्रवेश कर नगर के जैन मंदिरों के दर्शन किए पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर जी में मुनि श्री के सान्निध्य में शांतिधारा मनीष चौधरी, रितेश मुंशी, राहुल स्वास्तिक, अक्षय सराफ, हेमू जैन, कमल केके, सुरेश मुंशी, सुनील मास्टर साब, कमल जटाले, अशोक पंचोलिया के द्वारा की गई तत्पश्चात मुनि श्री प्रवचन हाल में विराजमान हुए। सभा का शुभारंभ प्रदीप पंचोलिया द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री सुयश सागर जी महाराज ने अपनी दिव्य देशना का रस पान करवाते हुए कहा कि व्यक्ति को सुख प्राप्त जब ही होता है। जब तक व्यक्ति पुरुषार्थ जागृत नहीं करता। तब तक प्राप्त सुख सह योगों का लाभ नहीं मिल पाता है। परिमंड वस्तु का स्वभाव है और प्रति समय वस्तु अपने नए रूप को प्राप्त हो रही है।
कुछ लोगों को इस बात का बोध होता है पर कुछ लोगों को इस बात का बोध नहीं होता है, जो वस्तु के इस स्वभाव को जानते है, वो साम्य भाव को प्राप्त होते है ओर जो वस्तु के इस स्वभाव को नहीं जानते है वो वे विकल्प को प्राप्त होते है। आज के इस शुभ अवसर पर सुयश सागर जी महाराज को आहार दान का सौभाग्य साधना देवेंद्रकुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ। दोपहर में मुनिराज द्वारा समयसार की क्लास संपन्न हुई। तत्पश्चात खंडवा की ओर मंगल विहार हुआ। इस अवसर पर हेमंत काका, सरल जटाले, सुधीर जैन, निमिष जैन, आशीष जैन, महेंद्र मुंशी, सुनील पांवणा, अचित्य जैन, राजू जैन, रेखा जैन, चेतना गोधा सहित सभी समाजजन उपस्थित थे।













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