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नैनवां में मुनिश्री आदित्य सागर जी का मंगल प्रवेश: दूर-दूर से आए मुनि भक्त उमड़े


नैनवां में बुधवार सुबह 7 बजे की संपूर्ण दिगंबर जैन समाज ने गाजे-बाजे और जय घोष से कृष्ण मैरिज गार्डन में मुनि श्री आदित्य सागर जी संघ की अगवानी की। जगह-जगह मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन कर पुष्प वर्षा की गई। महाराज श्री संघ सहित शहीद भगतसिंह सर्किल होते हुए शांति वीर धर्मस्थल पहुंचे। जहां पर मुनिसंघ ने जिनालय के दर्शन किए। अग्रवाल बड़े मंदिर में धर्मसभा हुई। नैनवा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


नैनवां। नगर में बुधवार सुबह 7 बजे की संपूर्ण दिगंबर जैन समाज की ओर से अपार महिला मंडलों पुरुषों ने गाजे-बाजे और जय घोष से कृष्ण मैरिज गार्डन में मुनि श्री आदित्य सागर जी संघ की अगवानी की। जगह-जगह मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन कर पुष्प वर्षा की गई। महाराज श्री संघ सहित शहीद भगतसिंह सर्किल होते हुए शांति वीर धर्मस्थल पहुंचे। जहां पर मुनिसंघ ने जिनालय के दर्शन किए। अग्रवाल बड़े मंदिर में धर्मसभा हुई। धर्म सभा से पूर्व भगवान महावीर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित संघ के संघपति विकास सिटी भीलवाड़ा, जयपुर और ग्वालियर से आए भक्तों ने किया। इसके बाद उनका स्वागत सम्मान वर्षा योग समिति अध्यक्ष कमल कुमार मारवाड़ा, विनोद बरमूडा और प्रमोद जैन आदि ने किया। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य मोहनलाल कमलकुमार जैन मारवाड़ा को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य बाबूलाल हितेश कुमार जैन बरमूडा परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में मंगलाचरण की प्रस्तुति अमीषी जैन अवनी जैन ने नृत्य के रूप में दी।

गुरु की निंदा करने वाला दुःखी रहता है
वर्षा योग समिति प्रचार मंत्री महावीर कुमार सरावगी ने बताया कि मुनि श्री आदित्य सागरजी ने कहा कि आज का मनुष्य संसार में बहुत दुःखी है जबकि, सुख-दुःख उसकी आत्मा में है। दूसरों के शब्दों और भाषा बोलने से दुःखी होना दुःख नहीं है। उन्होंने कहा कि सच्चे गुरु सदैव ही भक्त को अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु की प्रशंसा करना अच्छा गुण है। गुरु की निंदा करना बुरा कर्म है। मुनिश्री ने बंद पिंजरे में तोते का उदाहरण देते हुए बताया कि एक तोता पिंजरे में बंद है। वह आजाद होना चाहता है। सदैव राम-राम बोलता है। फिर भी उसे स्वतंत्रता का मार्ग नहीं मिल रहा है। तोते ने कुछ समय के लिए अपने आप को अचेत मरण अवस्था में पिंजरे में कर लिया। तोते के मालिक ने देखा तोता किस प्रकार हो रहा है, इसे बाहर निकाल कर देखना चाहिए। पिंजरे का गेट खोला उसे निकाला और तोता राम-राम करते हुए उड़ गया।

मुनिश्री ने नैनवा की तुलना स्वस्तिधाम से की
मुनिश्री ने नैनवा के जिनालय के दर्शन कर बताया कि नैनवा के मंदिर सुंदर प्रतिमा स्वस्ति धाम से कम नहीं है। बहुत बड़ा यहां जैन समाज है। बहुत सुंदर जिनालय है। लोगों की भीड़ को देखकर ऐसा लगा सचमुच ही नैनवा एक धर्म नगरी है। मुनिश्री आदित्य सागरजी का आहार का सौभाग्य मोहनलाल कमलकुमार मारवाड़ा, सुमतिप्रकाश अशोककुमार मोडिका, जयकुमार अनिल कुमार जैन जहाजपुर वाले वालों ने 1 दिन में ऐसा सौभाग्य प्राप्त किया। धर्मसभा में राजधानी जयपुर, कोटा, ग्वालियर, एमपी, यूपी, केकड़ी, बूंदी, गोठड़ा, जजावर, बासी, दुगारी, रानीपुर नगर फोर्ट, पलाइर्, उनियारा आदि स्थानों के मुनि भक्तों ने धर्म का लाभ प्राप्त किया। सायंकाल 5.30 बजे अग्रवाल जैन मंदिर से मुनि का बिहार नगर फोर्ड के लिए होगा। धर्मसभा का संचालन पं नरेंद्र शास्त्री और मोहन जैन मारवाड़ा ने किया।

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