आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी एवं समाधिस्थ गुरु आचार्य श्री दयासागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुभूषण मति माताजी का 41 वां अभिनंदन वर्षा योग 2025 के लिए मंगल प्रवेश 2 जुलाई को संतोष नगर गारियावास में हुआ। मंगल प्रवेश के दौरान रिमझिम जलवृष्टि के साथ, गुरु भक्त श्रावक-श्राविकाओं ने भक्ति नृत्य किया। उदयपुर से अशोक कुमार जेतावत की पढ़िए, यह खबर…
उदयपुर। आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी एवं समाधिस्थ गुरु आचार्य श्री दयासागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुभूषण मति माताजी का 41 वां अभिनंदन वर्षा योग 2025 के लिए मंगल प्रवेश 2 जुलाई को संतोष नगर गारियावास में हुआ। मंगल प्रवेश के दौरान रिमझिम जलवृष्टि के साथ, गुरु भक्त श्रावक-श्राविकाओं ने भक्ति नृत्य किया। महानगर के मुख्य मार्गों पर अनेक स्वागत द्वार बनाए गए। श्रावक-श्राविकाओं ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों के सामने रंगोली सजाई। गुरु मां का दूध और नीर से पाद प्रक्षालन किया। पुष्प वृष्टि एवं मंगल आरती करते हुए श्री वासुपूज्य दिगंबर जैन 20 पंथी मंदिर संतोष नगर गारियावास में प्रवेश करवाया गया। नगर प्रवेश पर धर्म सभा को उद्बोधित करते हुए आर्यिका श्री ने कहा कि घर में मेहमान आने से पूर्व कितना पुरुषार्थ करते हैं। उससे अधिक प्रयास हमें साधु के नगर प्रवेश पर होना चाहिए। गुरु मां ने कहा कि जैसे जैसे वर्षा का नीर झरता है, वैसे ही गुरु सानिध्य में वर्षा योग में आगम की झमाझम बरसात होगी। बस आपको उसमें अवगाहन करना है। वर्षा का पानी बिना भेदभाव के सब पात्रों का भरता है।
अब देखना है आपका पात्र कितना बड़ा है। पात्र बड़ा होना पर्याप्त नहीं, उसके मुंह को खुला छोड़ना पड़ेगा। एक और शर्त है कि पात्र भीतर से खाली होना चाहिए। वर्षा योग में आपको सीखना है। स्वयं से स्वयं का परिचय पहचाना है। खुद को और जैनत्व के गौरव की रक्षा के लिए आर्ष परंपरा की आन-बान-शान के लिए अपनी धर्म चेतना को जागृत करना है। गुरु मां ने प्रवेश के साथ ही भीतर पड़े अपविष्ट को निकालना प्रारंभ कर दिया। भक्तों उत्साह चरम पर था। सभी ने गुरु मां के जयकारों से धरती-आसमान एक कर दिए। वंदामी वंदामी वंदामी।













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