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आर्यिका विशुद्धमति माताजी ससंघ का तलवंडी जैन मंदिर में मंगल प्रवेश: श्रद्धालुओं ने पलक पांवडे बिछा की भव्य अगवानी 


आर्यिका विशुद्धमति माताजी, आर्यिका विज्ञमति माताजी 8 पिच्छी ससंघ का गुरुवार को तलवंडी जैन मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ। यहां श्रद्धालुओं ने उनका भाव भीना अभिनंदन कर अगवानी की। कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर…


कोटा। आर्यिकाश्री विशुद्धमति माताजी एवं आर्यिका श्री विज्ञमति माताजी 8 पिच्छी ससंघ का नगर के तलवंडी क्षेत्र में गुरुवार को ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। मंगल विहार सुबह 7.30 बजे रामपुरा स्थित जैन गली से प्रारंभ होकर गुमानपुरा मार्ग से शॉपिंग सेंटर जैन मंदिर के दर्शन करते हुए, एरोड्रम होते हुए हवाई अड्डे के सामने से गुजरते हुए श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, तलवंडी पहुंचा। सुबह 8.30 बजे हवाई अड्डे के सामने से बैंडबाजों, ढोल नगाड़ों और धार्मिक ध्वजाओं के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में घोड़े, ऊंटगाड़ी, शहनाई वादन, कच्छी घोड़ी नृत्य एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति लोक कलाकारों ने दी। शानदार लवाजमा माताजी के साथ चला, जो सबके आकर्षण का केंद्र रहा। शोभायात्रा में पाठशाला के छोटे-छोटे बच्चे जैन ध्वजा लेकर पंक्ति बद्ध होकर चले। कोटा शहर के विभिन्न महिला मंडल, गणमान्य श्रेष्ठीजन, युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में शोभायात्रा में शामिल रहे।

जगह-जगह किया गया माताजी का पाद प्रक्षालन 

महामंत्री प्रकाश सामरिया ने बताया कि शोभायात्रा मार्ग में जगह-जगह माताजी का पाद प्रक्षालन किया गया। बड़ी संख्या में स्वागत द्वार बनाकर शोभायात्रा का स्वागत किया। शीतकालीन वाचना अध्यक्ष अशोक पहाडिया ने बताया कि माताजी के प्रवास के दौरान श्रद्धालुओं को शीतकालीन वाचना का लाभ मिलेगा। आज के पाद प्रक्षालन, दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट का पुण्य अर्जन अशोक, मंजू पहाड़िया परिवार, ओम, माधुरी अग्रवाल डायमंड वालों ने प्राप्त किया। जुलूस को पिंकेश सांवला, शुभम लुहाड़िया, राजकुमार सहित पूरी युवा शक्ति टीम ने व्यवस्थित रूप से कराया। सभी के अल्पाहार की व्यवस्था राजेश बरमुंडा, मनोज पाटनी ने संभाली। श्री सकल दिगंबर जैन समाज, कोटा के पदाधिकारी प्रकाश बज, जेके जैन , विमल नानता, विमल वर्धमान सहित सभी श्रावक-श्राविकाओं ने अधिक से अधिक संख्या में मंगल विहार में सहभागी बनकर गुरु माताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।

बच्चे भी संस्कारवान होकर धर्म मार्ग पर बढ़ रहे 

राजू लुहाड़िया ने बताया कि आर्यिका श्री विज्ञमति माताजी ने कहा कि आज से 7 वर्ष पूर्व जब संघ का इस धरा पर प्रवेश हुआ था तब माताजी ने समाज को जो धर्म और ज्ञान के संस्कार दिए थे। वह सब आज फलीभूत हो रहे हैं। यह सब उनके परिवार जनों के संस्कार का ही परिणाम है कि आज छोटे-छोटे बच्चे भी संस्कारवान होकर धर्म के मार्ग में आगे बढ़ रहे हैं और इतना सुंदर मंगलाचरण कर रहे हैं। आज से सात वर्ष पूर्व इसी प्रांगण में बड़ी माताजी के आशीर्वाद से हमने स्वयं को सिंचित किया था। उसी का परिणाम है कि हम धर्म के मार्ग में आगे बढ़ पा रहे हैं। स्वयं का कल्याण कर रहे हैं। सभी भक्तजनों को माताजी ने धर्म वृद्धि और सुखी जीवन का आशीर्वाद भी दिया।

वर्ष 2008 में हुआ दीक्षा महोत्सव 

कार्यध्यक्ष जेके जैन ने बताया कि वर्ष 2008 में मल्टी पर्पज स्कूल, कोटा में गुरु मां विशुद्धमति माताजी के सान्निध्य में ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव हुआ था। जिसमें नौ नवीन दीक्षार्थियों को संयम पथ पर दीक्षित किया गया। इसके बाद वर्ष 2018 में तलवंडी मंदिर में भव्य चातुर्मास तथा वर्ष 2019 में दशहरा मैदान में गुरु मां का स्वर्णिम दीक्षा महोत्सव मनाया गया था।

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