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बड़वानी में आर्यिका संघ का चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश: सात वर्षों बाद वर्षायोग का बना अवसर 


नगर में रविवार को आचार्य विराग सागर जी की शिष्य आर्यिका विकुंदनश्री माताजी और संघस्थ क्षुल्लिका विश्वरत्न श्री माताजी का मंगल प्रवेश धार जिले से बड़वानी नगर में हुआ। आर्यिका माताजी निमाड़ प्रवासकर शनिवार का रात्रि विश्राम गणपुर में करने के बाद प्रातः विहार कर बड़वानी मंगल प्रवेश किया। समाजजनों ने कसरावद रोड पहुंचकर मंगल अगवानी की। बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर…


बड़वानी। नगर में रविवार को आचार्य विराग सागर जी की शिष्य आर्यिका विकुंदन श्री माताजी और संघस्थ क्षुल्लिका विश्व रत्न श्री माताजी का मंगल प्रवेश धार जिले से बड़वानी नगर में हुआ। आर्यिका माताजी निमाड़ प्रवासकर शनिवार का रात्रि विश्राम गणपुर में करने के बाद प्रातः विहार कर बड़वानी मंगल प्रवेश किया। समाजजनों ने कसरावद रोड पहुंचकर मंगल अगवानी की। समाज की महिलाएं मंगल कलश लिए और समाज के बच्चे जैन धर्म ध्वजा ले कर अगवानी करने पहुंचे। आर्यिका संघ का पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और श्रीफल चढ़ाया गया। जुलूस के रूप में बैंडबाजों के साथ जैन भजनों के साथ नृत्यकर जैन धर्म के जयकारे लगाकर चल रहे थे। माताजी के मंगल प्रवेश जुलूस नवलपुरा, गुरुद्वारा, कोर्ट चौराहा, क्लब रोड़, कारंजा चौराहा मोटीमाता, महात्मा गांधी मार्ग, रणजीत चौक होते हुए जैन मंदिर पहुंचे। पूरे रास्ते पर जैन समाजजनों ने अपने-अपने घरों के सामने रंगोली से सजाकर माताजी संघ का पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और श्रीफल चढ़ाकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

प्रातः भगवान के अभिषेक, शांतिधारा होगी 

विगत सात वर्षों के अंतराल के बाद किसी श्रमण का वर्षायोग चातुर्मास का बड़वानी नगर में होने का संयोग बना है और माताजी का प्रथम बार पृथक चातुर्मास हो रहा है। जिससे कि संपूर्ण समाज में हर्ष व्याप्त है। माताजी ने मंदिर पहुंचकर दर्शन किए और धर्माेपदेश दिया और बोला कि हमें हमारी आपसी कटुता, विवाद को छोड़कर देव, शास्त्र,गुरु के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होना चाहिए और ज्ञान को प्राप्त करना चाहिए और अपने जीवन को धर्म और त्याग के मार्ग पर लगाना चाहिए। सोमवार से रोजाना प्रातः भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, प्रवचन बारह अनुप्रेक्षा और अन्य विषयों की धर्म की क्लास होगी। शाम को आनंद यात्रा होगी। इसमें सभी शामिल होकर धर्म लाभ लें। इस अवसर पर जैन समाज के बच्चे, युवा, महिला, पुरुष आदि उपस्थित थे।

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Shreephal Jain News

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