अनेक त्यागियों की नगरी में शनिवार सुबह 7 बजे आचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य विशद सागर जी महाराज सहित दस पिच्छी का मंगल प्रवेश बेड़िया से हुआ।सभी समाजजनों आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन कर पुण्य अर्जित किया। आचार्य श्री की अगवानी खरगोन रोड चौधरी फ्यूल्स से सभी समाजजनों ने की। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावद। अनेक त्यागियों की नगरी में शनिवार सुबह 7 बजे आचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य विशद सागर जी महाराज सहित दस पिच्छी का मंगल प्रवेश बेड़िया से हुआ।सभी समाजजनों आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन कर पुण्य अर्जित किया। आचार्य श्री की अगवानी खरगोन रोड चौधरी फ्यूल्स से सभी समाजजनों ने की। आचार्य संघ ने नगर में जैन मंदिरों के दर्शन किए। बड़े मंदिर के सामने स्थित आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में सभा का शुभारंभ मंगलाचरण.से हुआ। मंगलाचरण प्रशांत जैन ने प्रस्तुत किया। आर्यिका भक्तिभारती माताजी ने अपनी देशना में कहा कि आज कई लोग अभागे होते हैं। जो नगर में होकर भी यहां नहीं आ पाते हैं, उन्हें पुण्य के अवसर को नहीं खोना चाहिए।
मिले सुअवसर को अच्छे कार्य में लगाना चाहिए
माताजी ने कहा कि इस मिले सुअवसर को अच्छे कार्य में लगाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में अपनी उपस्थित जरूर देना चाहिए। हमें प्रवचन सुनना चाहिए। आहार विहार करवाना चाहिए। वैयावृती करनी चाहिए और जो आचार्य संघ के प्रति हमारे जो बन सके, वो कार्य करना चाहिए। आर्यिका माताजी ने आचार्य श्री गुणों का गुणानुवाद किया। मुनि श्री शुद्धोपयोग सागर जी ने कहा कि ये नगर कोई साधारण नगर नहीं है। यहां से राष्ट्र गौरव आचार्य वर्धमान सागर जी सहित 18 साधुओं ने अपना जीवन धन्य किया है। सनावद ऐसा नगर है जो तीर्थक्षेत्र के बीच में बसा है। नगर का नाम उसके कर्मों से हुआ करता है। इस सनावद में हम पहले आचार्य विभव सागर जी के साथ आए थे। सरोवर में पानी हो तो पक्षियों को बुलाना नहीं पड़ता और समाज में भक्ति हो तो साधुओं को बुलाना नहीं पड़ता। अब यह सिद्ध हो गया है कि सनावद में भक्ति है कि साधुओं की सिद्ध भूमि में भक्ति है क्योंकि, हम यहां स्वयं आए हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि साधुओं की सिद्ध भूमि में इसलिए साधु दौड़-दौड़ कर चले आते हैं।
अपने बच्चों को संस्कार देकर बड़ा करें
आचार्य श्री विशद सागर जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रवचन सभा में अधिकतर वो लोग उपस्थित होते हैं, जो रिटायरमेंट में की ओर होते हैं। बाकी जिनको कुछ सीखना है, जिनको कुछ आगे बढ़ना है। ऐसे लोग कम नजर आते हैं। जब हम लोगों से बात करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कार देना चाहिए। बच्चों को मंदिर लेकर जाना चाहिए, जो व्यक्ति आज अपने बच्चों को संस्कार देने के लिए उंगली पकड़ कर मंदिर लेकर आता है। जब कालांतर में आप का बुढ़ापा होता है, चलना नहीं होता जब वो संस्कारित बेटा आप को हाथ पकड़ कर मंदिर के दर्शन करवाता है। आपने बच्चे को पढ़ाकर नौकरी के लिए भेज दिया तो आप ने उसके नौकर बना दिया। नौकर बनने वाला बेटा जब अपने माता-पिता की सेवा तो बहुत दूर की बात है। जब आप का बुढ़ापा आया तो वो नौकरी करने वाला बेटा आप के लिए नौकर रख देगा। इसलिए बचपन से ही अपने बच्चों को धर्म के प्रति जागरूक रखें उन्हें संस्कार दें।
48 से दीपों पाठ करवाया
प्रवचन के बाद आहार चर्या हुई। आचार्य श्री को आहार दान देने का सौभाग्य रजत कुमार जैन बड़ूद परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री ने दोपहर में श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में विषापहार स्तोत्र का 48 से दीपों पाठ करवाया। आचार्य निरंतर मालवा-निमाड़ के क्षेत्र के दर्शन कर इंदौर की ओर विहाररत हैं आप का चातुर्मास इंदौर नगर में होगा।













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