आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी संघ का जैसे ही नगर में मंगल आगमन हुआ तो इंद्रदेव भी जमकर बरसे और इंद्रदेव ने भी भव्य एवं अभूतपूर्व अगवानी की। शांतिनाथ दिगंबर जैन नसिया से डमरू एवम ताशों के साथ जय जयकार करते हुए पुलिस थाना चौराहा लाया गया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
रामगंजमंडी। आचार्य श्री विराग सागर महाराज के शिष्य आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी संघ का जैसे ही नगर में मंगल आगमन हुआ तो इंद्रदेव भी जमकर बरसे और इंद्रदेव ने भी भव्य एवं अभूतपूर्व अगवानी की। रामगंजमंडी के इतिहास में आचार्य श्री संघ की ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व अगवानी देखने को मिली क्या बच्चे क्या युवा क्या बुजुर्ग हर कोई बस गुरु भक्ति भक्ति मगन था। भारी वर्षा के बाद भी भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। पुलिस थाना चौराहे पहुंचने पर भक्तों ने अभूतपूर्व अगवानी की। जहां गुरुदेव को शांतिनाथ दिगंबर जैन नसिया से डमरू एवम ताशों के साथ जय जयकार करते हुए पुलिस थाना चौराहा लाया गया। जैसे ही गुरुदेव पुलिस थाना चौराहा पहुंचे भक्तों का उत्साह और दुगुना हो गया। उसके बाद भव्य शोभायात्रा के रूप में गुरुदेव को नगर के प्रमुख मार्गाे से होते हुए श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया। मार्ग में गुरुदेव ने महावीर दिगंबर जैन मंदिर के दर्शन किए। जहां महावीर दिगंबर जैन मंदिर के द्वारा गुरुदेव का की अगवानी की गई एवं पद प्रक्षालन कर मंगल आरती की।
शोभायात्रा का दृश्य अलौकिक एवं विहंगम था
हर कोई जब गुरुदेव संघ अगवानी के दृश्य को देख रहा था। वह अपने आप में हर्षित था। निश्चित रूप से रामगंजमंडी नगर के इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय लिखा गया। संपूर्ण नगर दुल्हन की तरह सजा हुआ था। जगह-जगह तोरण द्वार लगे हुए थे एवं जगह-जगह गुरुदेव की पद प्रक्षालन कर मंगल आरती कर अगवानी की गई। इस शोभायात्रा में नगर के प्रथम नागरिक नगर पालिका अध्यक्ष अखिलेश मेडतवाल ने भी अपनी सहभागिता दी एवं आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी के साथ आदिनाथ जैन श्वेतांबर श्री संघ द्वारा श्वेतांबर जैन मंदिर के बाहर गुरुदेव की अगवानी की। नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया संपूर्ण नगर तोरण द्वार से सजा हुआ है। चारों ओर देखो देखो कौन आया जिन शासन का शेर आया, जयकारा गुरुदेव का जैनम जयतु शासनम का उद्घोष सुनाई पड़ रहा था। भक्तिमय भजनों पर भक्त झूम रहे थे। जगह जगह गुरुदेव का पद प्रक्षालन आरती कर अगवानी की सचमुच अपने आप में यह दृश्य विहंगम एवं अलौकिक था।
शोभायात्रा में ड्रोन द्वारा स्क्रैप से वर्षा की गई
शोभायात्रा में ड्रोन द्वारा स्क्रैप से वर्षा की गई। हाथों में जैन ध्वज लिए बच्चे शोभायात्रा को पुलकित कर रहे थे। इसी के साथ महिला शक्ति अष्ट प्राप्तिहार्य, रत्न थाली, डांडिया चवर लिए हुए भक्ति से ओतप्रोत थी। दिव्य घोष शोभायात्रा की शोभा को शोभायवान बना रहा था। मंगल की कामना करते हुए महिलाएं मंगल कलश लिए सम्मालित थीं। इसी के साथ शोभायात्रा के मंदिर के समीप पहुंचने पर एक साथ युवा शक्ति ने 20 विशेष थाल सजाकर गुरुदेव के चरणों का पद प्रक्षालन किया एवं ड्रोन के द्वारा स्क्रैप की वृष्टि की गई। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने पर मंदिर के प्रवेश द्वार पर सकल दिगंबर जैन समाज रामगंजमंडी एवम चातुर्मास व्यवस्था समिति द्वारा गुरुदेव के चरणों का पद प्रक्षालन एवं मंगल आरती कर अगवानी की। इसके उपरांत गुरुदेव ने जिनालय के दर्शन किए। दर्शन उपरांत धर्मसभा हुई। धर्म सभा में सर्वप्रथम आचार्य श्री विराग सागर महाराज के चित्र का अनावरण बाहर से आए धर्म प्रेमी बंधुओ ने किया। धर्मसभा में अलौकिक मंगलाचरण की प्रस्तुति छोटी-छोटी बालिकाओं द्वारा दी गई। इस अवसर पर गुरुदेव के चरणों का पद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य भागचंद पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर समाज की ओर से संरक्षक अजीत सेठी ने अपने विचार रखें। समारोह का संचालन राजकुमार गंगवाल ने किया।
संसार में दुर्लभ आत्मा को जानना है
धर्मसभा में सर्वप्रथम मुनिश्री संदेश सागर महाराज ने अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि संसार में दुर्लभ आत्मा को जानना है। यह दुर्लभ आपने आज सुलभ कर लिया। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा पुण्य दिगंबर मुनि के आगमन पर होता है। पुण्य आपका प्रबल हो गया। मुनिश्री प्रांजल सागर महाराज ने अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि रामगंजमंडी आकर विनिश्चय सागर महाराज के दर्शन कर जाना आकर चरण स्पर्श कर जाना। अपनी चिरपरिचित अंदाज में मुनि श्री ने अपनी कविता सुनाई। हर पल गुरुवर तुम्हारी याद सताती है आई विश यू गुरुवर। इस अवसर पर आचार्य श्री ने अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि सबसे बड़ा त्याग जैन दर्शन में है करुणा अहिंसा जैन दर्शन में ही होती है। जैन दर्शन को समझना गहराई में उतरना बहुत जरूरी है। गुरुवर ने आस्था के विषय में भी प्रकाश डाला आस्था ही दिशा बदलने में समर्थ है। आस्था की समझ यदि मन में आ जाती है तो धर्म समझ आ जाता है। इस अवसर पर आचार्य श्री के सानिध्य में ही नेमिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।













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