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आचार्य श्री सुबल सागर जी ससंघ का जैन मंदिर में मंगल प्रवेश : चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ आचार्य श्री के प्रवचन हुए 


नगर गौरव आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज ससंघ का गौरी किनारा जैन मंदिर में मंगलवार को मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री के सानिध्य में श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर गौरी किनारा मंदिर में श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई एवं आचार्य श्री के मंगल प्रवचन हुए। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…


भिंड। नगर गौरव आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज ससंघ का गौरी किनारा जैन मंदिर में मंगलवार को मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री के सानिध्य में श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर गौरी किनारा मंदिर में श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई एवं आचार्य श्री के मंगल प्रवचन हुए। श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान पर प्रथम कलश करने का सौभाग्य दीपचंद्र जैन, अंकित जैन को प्राप्त हुआ एवं चार कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य आशु जैन, ऋषभ जैन, अभिषेक जैन, अनीश जैन अक्षत जैन ने प्राप्त किया। श्री जी की प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य लोटनलाल जैन, धर्मचंद्र जैन (मोनू) बारे परिवार पीथमपुर वाले को सौभाग्य प्राप्त हुआ एवं द्वितीय शांतिधारा करने का सौभाग्य अनीश जैन, अक्षत जैन महादे परिवार को प्राप्त हुआ एवं महा आरती करने का सौभाग्य चंद्रप्रभु युवा समिति गौरी किनारा परिवार को प्राप्त हुआ। एवं आचार्य श्री सुबल सागर जी का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य राकेश जैन रामबिहारी गौरी किनारा को प्राप्त हुआ एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्री विराग विशुद्ध बहु मंडल एवं चंद्रप्रभु महिला मंडल को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में कभी भी अवसर मिले तब हमें प्रभु दर्शन एवं अभिषेक पूजन करने से अनंत कर्मों की निर्जरा होती है।

अनेक उपवास का फल मिलता है। जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। आचार्य ने बताया कि जब श्रावक घर से मंदिर जाने के लिए तैयार होता है तब एक उपवास का फल मिलता है और जब घर से बाहर आता तब दो उपवास का फल और जब जो मंदिर के बाहर पहुंच जाता तो 12 उपवास का फल और जब मंदिर में प्रवेश करता है और प्रभु अभिषेक करता है तो अनेक उपवास का फल मिलता है। मंच संचालन शैलू जैन एलआईसी ने किया। कार्यक्रम में सकल जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।

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