नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। बुढ़ार से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर…
बुढ़ार। नव-निर्मित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के 5वें दिवस मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने भगवान के कैवल्य ज्ञान के बाद समवसरण की गणधर पीठिका से अत्यंत मार्मिक एवं आध्यात्मिक उद्बोधन दिया। मुनि श्री ने कहा कि इस अनादि संसार में जीव चारों गतियों और 84 लाख योनियों में निरंतर भटक रहा है,उसके इस भटकाव का मूल कारण उसके अंतर में पलने वाला मोह, मिथ्यात्व और अज्ञान है। उन्होंने नरक गति का वर्णन करते हुए कहा कि वहाँ जीव को असहनीय यातनाएं सहनी पड़ती हैं। कभी उसे कड़ाही में डाला जाता है तो कभी तलवार की तीक्ष्ण धार का सामना करना पड़ता है, मानो हजारों बिच्छुओं ने एक साथ डंक मार दिए हों। नरक से निकलकर जीव कभी एक इंद्रिय, कभी द्वि-इंद्रिय, फिर तिर्यंच गति में भ्रमण करता हुआ मनुष्य जन्म प्राप्त करता है किंतु, मनुष्य जीवन में भी वह कभी भिखारी बनकर कष्ट भोगता है। मुनि श्री ने कहा कि मोह, मिथ्यात्व और अज्ञान आत्मा के प्रबल शत्रु हैं। इन्हीं के कारण जीव अपने आत्मस्वरूप से दूर होकर पंचेंद्रिय विषयों तथा क्रोध, मान, माया, लोभ जैसी कषायों में फँसकर पाप और दुर्गतियों का भागी बनता है।
सम्यक दर्शन ही धर्म का मूल
समवसरण में विराजमान मुनि श्री प्रसाद सागरजी, मुनि श्री शीतलसागर जी, मुनि श्री संधानसागर जी तथा
क्षुल्लक श्री समादर सागर जी महाराज, बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया,बाल ब्रह्मचारी अभय भैया
ने भी धार्मिक प्रश्न प्रस्तुत किए। जिनका समाधान मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने औंकार ध्वनि के साथ किया। उन्होंने कहा कि जब तक जीव अपने आत्मस्वरूप को नहीं समझेगा तब तक उसे सम्यक दर्शन की प्राप्ति नहीं हो सकती। भव-बन्धन से मुक्ति का एकमात्र उपाय सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र रूपी रत्नत्रय की पूर्णता है। दर्शन मूलो धम्मो का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सम्यक दर्शन धर्म का मूल आधार है। बिना सम्यक्त्व के न ज्ञान शुद्ध होता है और न चरित्र।
‘भगवान महावीर द्वार’ का ऐतिहासिक शिलान्यास
पंचकल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर एक और ऐतिहासिक क्षण जुड़ा जब प्रातःकाल मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ की मंगलमय उपस्थिति में भगवान महावीर द्वार का विधिवत शिलान्यास हुआ। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक जय सिंह मरावी, नगर परिषद अध्यक्षा शालिनी सरावगी एवं परिषद सदस्यों ने श्रद्धा-भक्ति के साथ शिलान्यास किया। धर्ममय वातावरण में जयघोष गूँज उठा। मुनि श्री ने कहा कि
जब कोई नगर में भगवान के नाम के साथ प्रवेश करता है तो उसके सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। ‘भगवान महावीर द्वार’ केवल निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक बनेगा। इस अवसर पर राज्यमंत्री दिलीप जयसवाल, कलेक्टर केदार सिंह तथा अन्य गणमान्य जनों ने समवसरण में श्रीफल समर्पित किया। भागवत कथा वाचक डॉ. मदनमोहन मिश्र (चित्रकूट धाम) भी उपस्थित रहे।













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