अंचल के अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में 23 नवंबर को वह ऐतिहासिक दृश्य साकार होने जा रहा है, जिसके लिए जैन समाज वर्षों से प्रतीक्षारत था। मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के पावन करकमलों से पहली बार एक ही मंच पर 14 साधक जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
थूवोनजी। अंचल के अतिशय क्षेत्र दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में 23 नवंबर को वह ऐतिहासिक दृश्य साकार होने जा रहा है, जिसके लिए जैन समाज वर्षों से प्रतीक्षारत था। मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के पावन करकमलों से पहली बार एक ही मंच पर 14 साधक जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे। दर्शनोदय तीर्थ के हजार वर्ष पुराने इतिहास में यह पहला अवसर होगा, जब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ दीक्षा प्रदान की जाएगी। इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन में ससंघ क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागरजी महाराज एवं क्षुल्लक श्री विदेह सागरजी महाराज को भी जैनेश्वरी दीक्षा मिलेगी। इस ऐतिहासिक पलों को लेकर समूचे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह की लहर है। जैन समाज अशोक नगर के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि यह वह क्षण है, जब दर्शनोदय तीर्थ के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुनि श्री सुधासागरजी महाराज सबसे पहले क्षुल्लक वरिष्ठ सागरजी एवं क्षुल्लक विदेह सागरजी को दीक्षा देंगे। इसके साथ ही संघ के 12 बाल ब्रह्मचारी भी इस अवसर पर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे।
आध्यात्मिक पर्व में उपस्थिति का आग्रह
दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी की समिति अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगलदीप, मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप जैन, अनिल बंसल, डॉ. जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद एवं अन्य सदस्यों ने सभी से इस अद्वितीय आध्यात्मिक पर्व में उपस्थित रहने का अनुरोध किया है।
विश्वास हो तो जीवन चलता है, पर किसी पर विश्वास करना नहीं
दर्शन-सत्संग के दौरान मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जीवन में विश्वास अनिवार्य है, पर विश्वास किसी दूसरे पर करना उचित नहीं। जहां दो विरोधी तत्व साथ विद्यमान हों, वहां अनेकांत का धर्म अपनाना आवश्यक है। जैसे आंख और कान के कार्य अलग-अलग हैं, वैसे ही ज्ञान और दर्शन भी एक-दूसरे का काम नहीं कर सकते। संसार की हर व्यवस्था परस्पर विरोधों से संचालित होती है। सुख-दुःख, लाभ-हानि, आसाता-साता। ज्ञानी पुरुष दुःख को भी दुःख नहीं मानता, क्योंकि साधु के लिए इंद्रिय भोग विष-मिश्रित पकवान के समान हैं।
जिनकी होगी जैनेश्वरी दीक्षा-एक नजर में
ब्र. अक्षय जैन (छोटू) दमोह (मऊ), बीए, बीएड, एमए, श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर
आजीवन व्रत 26 अप्रैल 2025, संघ प्रवेश, 10 मई 2025, कार्य मुरैना छात्रावास अधीक्षक,
ब्र. अतिशय जैन (वासु) सागर (म.प्र.), बीए संस्कृत एमए आचार्य, शिक्षक, महावीर पब्लिक स्कूल, जयपुर, आजीवन व्रत 14 जनवरी 2019, संघ प्रवेश 23 मई 2024, ब्र. विवेक जैन मानोरिया ललितपुर (उ.प्र.), बीटेक, एमबीए फाइनेंस, एमए इकोनॉमिक्स, गुड़गांव एमएनसी में 12 वर्ष सेवा, आजीवन व्रत मई 2011, संघ प्रवेश 8 जुलाई 2024, ब्र. कमलेशकुमार जैन अजमेर, एमए बीएड शिक्षक (12 वर्ष), आजीवन व्रत 2016 कुंडलपुर, संघ प्रवेश आगामी दीक्षा, ब्र. आशु जैन जबलपुर, बीए इकोनॉमिक्स, आजीवन व्रत एवं संघ प्रवेश 19 अगस्त 2024, ब्र. अंकुर जैन असम (धुबड़ी), सिविल इंजीनियर
रक्षा मंत्रालय लेखा विभाग (6 वर्ष), आजीवन व्रत 17 अगस्त 2024, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2024, ब्र. मोनू जैन, जबलपुर, सीए, बीएड, एमएड, आजीवन व्रत 2014, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2024, ब्र. सोनू जैन जबलपुर, शिक्षक (16 वर्ष सेवा), आजीवन व्रत 2006, संघ प्रवेश 4 सितंबर 2014, ब्र. संयम जैन (ओजी) अहमदाबाद, बीटेक मैकेनिकल, टाटा मोटर्स में जूनियर इंजीनियर, आजीवन व्रत 20 सितंबर 2024, संघ प्रवेश 7 अक्टूबर 2024, ब्र. अंकित जैन, सागर, एमबीबीएस, मेडिकल ऑफिसर, आजीवन व्रत 11 अक्टूबर 2025, संघ प्रवेश 13 अक्टूबर 2025, सात प्रतिमा 1 नवंबर 2025, ब्र. राहुल जैन टोंक (राजस्थान), बीए मेडिकल व्यवसाय, आजीवन व्रत 3 अगस्त 2015, संघ प्रवेश फरवरी 2025 (कटनी), ब्र. सुयश जैन राहतगढ़ (सागर), बीएससी, पीसीएम, व्यवसाय, जैन ट्रेडर्स, आजीवन व्रत 7 दिसंबर 2020, संघ प्रवेश 14 फरवरी 2018, सात प्रतिमा 18 फरवरी 2025 को दीक्षा प्रदान की जाएगी।













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