सांगानेर स्थित चित्रकूट कॉलोनी में सोमवार को आयोजित जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव का दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा। सात मुमुक्षुओं ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम, भक्ति और वैराग्य के पथ पर आगे बढ़ते हुए दीक्षा ग्रहण की। जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य और अध्यात्म की ओर बढ़ने का प्रेरणास्रोत बन गया, जिसने हर उपस्थित व्यक्ति के मन में संयम और करुणा की ज्योति प्रज्वलित कर दी। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
जयपुर। सांगानेर स्थित चित्रकूट कॉलोनी में सोमवार को आयोजित जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव का दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा। सात मुमुक्षुओं ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम, भक्ति और वैराग्य के पथ पर आगे बढ़ते हुए दीक्षा ग्रहण की। इस दिव्य क्षण का साक्षी बनने पहुंचे हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। जब दीक्षार्थियों के केश लोचन का पवित्र क्षण आया, तो पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं और हाथ जोड़कर श्रद्धा से झुके हुए थे।
महोत्सव में दिगंबर जैन आचार्य सुंदर सागर, आचार्य शशांक सागर सहित सात संघों की 38 पिच्छिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का आयोजन भव्य रूप में हुआ, जहां सुबह जिनाभिषेक और पूजा-अर्चना के बाद बैंड-बाजों के साथ दीक्षार्थियों की विदाई शोभायात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम के गौरव अध्यक्ष राजीव जैन और अध्यक्ष अशोक बोहरा ने बताया कि सबसे पहले आचार्य सुंदर सागर ने सातों दीक्षार्थियों को दीक्षा संस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर सभी ने पूर्व की गलतियों के लिए क्षमा याचना करते हुए दीक्षा ग्रहण की अनुमति मांगी। आचार्य ने प्रवचन में कहा—
“इस कलिकाल में वैराग्य की भावना बहुत दुर्लभ है। भिक्षु जीवन लेने का नहीं, बल्कि देने का मार्ग है।”
इसके पश्चात आचार्य ने चतुरविध संघ, त्यागी व्रती, विद्वान और श्रद्धालुओं की स्वीकृति के बाद पंच मुट्ठी केश लोचन संपन्न किया। शांति मंत्र के साथ सभी के सिर पर गंधोदक छिड़का गया और वर्धमान मंत्र के बाद श्रींकार लेखन किया गया।
नए नामों के साथ आरंभ हुआ संयम जीवन
मुनि दीक्षा के 28 मूल गुण और क्षुल्लक दीक्षा के 11 प्रतिमा संस्कार पूरे करने के बाद नामकरण संस्कार हुआ।
इस अवसर पर
– ब्रह्मचारी विकास बने मुनि सुयोग सागर
– ब्रह्मचारी उमंग बने मुनि श्रुतांश सागर
– ब्रह्मचारी पंकज बने मुनि सुधैर्य सागर
– ब्रह्मचारी प्रकाश बने क्षुल्लक सुधीर सागर
– ब्रह्मचारिणी किरण बनीं आर्यिका सुस्थिरमति
– ब्रह्मचारिणी मंजू बनीं क्षुल्लिका सुस्थितमति
– ब्रह्मचारिणी नत्थी बनीं क्षुल्लिका सुस्थानमति
नामकरण के साथ ही पूरा सभागार भगवान महावीर के जयकारों से गूंज उठा। इसके उपरांत सभी नवदीक्षित संतों और आर्यिकाओं को पिच्छिका, कमंडल और जाप्यमाला भेंट किए गए।
भक्ति रस में डूबी शाम
महामंत्री ओमप्रकाश कटारिया ने बताया कि भजन संध्या में प्रसिद्ध गायक विक्की डी. पारीख ने “भक्ति की है रात बाबा आज थान आनो है…” और “बाबा का दरबार सुहाना लगता है…” जैसे भावपूर्ण भजनों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। नवयुवक मंडल अध्यक्ष एडवोकेट सुरेन्द्र सोगानी ने बताया कि मंगलवार को नवदीक्षित साधु, आर्यिका, क्षुल्लक और क्षुल्लिका के रूप में प्रथम आहारचर्या संपन्न होगी। मुख्य संयोजक सुनील जैन ने बताया कि कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री गौतम दक, पं. सुरेश मिश्रा, श्रीप्रकाश तिवाड़ी, सुभाषचंद जैन, डा. कुणाल शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।













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