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स्वर्ण कलशों से की प्रभु की वृहद शांतिधारा : घट एवं रथ यात्रा के साथ अष्टाह्निका पर्व की हुई शुरुआत


अष्टाह्निका महापर्व के पावन प्रसंग पर 24 तीर्थंकर भगवन के चरणों भावना भाते हुए कि विश्व में सुख शांति समृद्धि और आरोग्य बना रहे इस हेतु 14 जुलाई रविवार से श्री दिगंबर जैन पोरवाड़ धर्मशाला में श्री सिद्ध चक्र मंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन आर्यिका सरस्वती माता जी ससंघ के सानिध्य में एवं विधानाचार्य नितिन झांझरी इंदौर के र्गदर्शन मे किया जा रहा है। पढ़िए सन्मति जैन की विशेष रिपोर्ट…


सनावद। अष्टाह्निका महापर्व के पावन प्रसंग पर 24 तीर्थंकर भगवन के चरणों भावना भाते हुए कि विश्व में सुख शांति समृद्धि और आरोग्य बना रहे इस हेतु 14 जुलाई रविवार से श्री दिगंबर जैन पोरवाड़ धर्मशाला में अतिशय कारी पुण्य को देने वाले श्री सिद्ध चक्र मंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन हेमचंद मंजुला जी भूच परिवार सनावद की ओर सें नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माता जी ससंघ के सानिध्य में एवं विधानाचार्य नितिन झांझरी इंदौर के र्गदर्शन मे किया जा रहा है

बताई विधान की महिमा

मीडिया प्रभारी सन्मति जैन काका ने बताया कि प्रातःकाल की मंगलबेला में सुबह 6.30 श्री शुपार्श्वनाथ मंदिर में कलश पूजन कर सर्वप्रथम घट एवं रथ यात्रा (शोभायात्रा)आर्यिका संग के साथ बड़े मंदिर सें निकाली गई, जिसमें पुरुष वर्ग स्वेत वस्त्र एवं महिलाएं पीली साड़ी में उपस्थित रहीं। तत्पश्चात यात्रा का समापन जैन धर्मशाला में हुआ जहां सर्वप्रथम मंडप शुद्धि और ध्वजारोहण के बाद अभिषेक, पूजन, शांतिधारा, मंडप प्रतिष्ठा एवं नित्य पूजन कर विधान प्रारम्भ किया गया।21 जुलाई तक प्रतिदिन सुबह 6.30 बजे से ये कार्यक्रम होंगे। इस अवसर पर उपस्थित आर्यिका सरस्वती माता जी ने कहा कि सिद्ध चक्र मंडल विधान करने वाला परिवार बहुत ही भाग्यशाली होता है। साथ ही इस विधान में बैठने वाले पूजन करने वाले भी बहुत ही भाग्यशाली होते हैं जिन्हें यह अवसर प्राप्त हो पाता है। जो इस विधान की पूजन करता हे वो दिन प्रतिदिन निरंतर वृद्धि करता है। विधान में सर्वप्रथम सरलीकरण किया जाता है उसके बाद ककड़ बंधन किया जाता है। जो भी कंकड़ बंधन बांधता है वो सभी प्रकार की रोक शोक बाधाओं से मुक्त हो जाता है। यह सिद्ध चक्र विधान करने से चार विधान करने के बराबर फल मिलता है। इस की महिमा बहुत ही अपार है। हम सबको भी अपने जीवन काल में एक बार सिद्ध चक्र मंडल विधान अवश्य करवाना चाहिए। इस अवसर पर सभी समाज जनों ने अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी सहभागिता दर्ज करवाई।

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