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आसमान में जख्मी हुए परिंदे, बचाने आए थे कुछ फ़रिश्ते: मकर सक्रांति पर घायल हुए 98 पक्षियों ने भरी उड़ान


सारांश

मकर संक्रांति के अवसर पंतगबाजी के उन्माद में लोगों ने उस दिन ऐसा धारदार जाल बना दिया, जिसमें उलझते पक्षी, अपने कटे पैर और पंखों से जख्मी होकर नीचे गिरते रहे । मगर एक संस्था ने उनमें से कुछ पक्षियों को सँभाला और फिर लौट दिया उन्हें उनका आसमान…पढ़िए विस्तार से… 


मकर संक्रांति का धार्मिक अवसर पर दान-पुण्य के परोपकार के लिए होता है लेकिन इस दिन कई शहरों में पंतगबाजी का उन्माद ऐसा होता है कि सुबह से शाम तक छतों पर, मुंडेरों पर लोग पंतगें उड़ाने का शौक़ रखते हैं। मगर जाने-अनजाने वो आसमान में उड़ते पक्षियों की राह गुजर में धारदार माँझे वाली डोर के रूप में ऐसे जाल बना देते हैं जिसमें उलझ कर पक्षी, अपनी जान गवां देते हैं या जख्मी होकर ज़मीन पर गिर जाते हैं और हमेशा के लिए अपनी उड़ान खो देते हैं। मगर जयपुर में कुछ लोग, ऐसे परिन्दों के लिए फ़रिश्ते बन कर आए और इनमें से कुछ पक्षियों को सँभाल कर उनका इलाज कर फिर उड़ने के लिए तैयार कर दिया ।

पक्षियों को फिर लौटा दिया उनका आसमान

जयपुर के रक्षा संस्थान और वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान मे गुरुवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर 98 कबूतरों को पिकॉक गार्डन मालवीय नगर जयपुर में रिलीज किया गया। यह सभी कबूतर मकर सक्रांति के समय ग्लास-कोटेड मन्झे से घायल हुए थे। रक्षा संस्था के वालंटियर रोहित गंगवाल ने बताया कि डॉ अशोक तंवर, डॉ स्टीफन हर्ष, डॉ एश्ले क्लेटन, वेटरनरी नर्स मैथ्यू रैंडल, डॉ रीना देव, डॉ राकेश मिश्रा, डॉ हीना गंजवाला, डॉ शुभम पंत, डॉ ऊष्मा पटेल, डॉ सुनील चावला, डॉ चार्मिन पिंटो, डॉ मोनी बौरा , डॉ भूपेश व 20 अन्य वेटेरिनरी डॉक्टर्स की टीम द्वारा करीब 540 पक्षियों का इलाज किया गया।

अब तक 165 पक्षियों को स्वछंद उड़ाया गया जिसमे 1 मोर, 5 बार्न ऑल, 3 स्पॉटेड ओलेट, 1एशियन कोयल, 2 टोटे, 5 टीथेरी, 4 चील, 1 कमेड़ी, 2 ग्रेटर कोकल ,2 ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, 1 हाउस स्विफ्ट,1 अशी प्रीनिया, 1 रोजी स्टर्लिंग, 2 कैटल इग्रेट व बाकी कबूतर रिलीज किए गए है।

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