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धर्म धरा का उत्कृष्ट क्षेत्र बुंदेलखंड, जिसकी माटी के कण-कण में धर्म है : आर्यिका विज्ञानमती माताजी ने बुंदेलखंड की धरा का किया गुणानुवाद 


श्रमण संस्कृति की विदुषी आर्यिका विज्ञानमती माताजी ने श्री दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय उदयनगर में अपने प्रवचन में बुंदेलखंड की वसुंधरा का गुणानुवाद करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की माटी के कण-कण में, उसकी हवाओं में धर्म है। वहां के लोग साधुओं की सेवा, चर्या को व्यवस्थित करने के लिए पूर्णतः सक्षम एवं निपुण हैं और उसकी अनुपालन भी करते हैं। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। श्रमण संस्कृति की विदुषी आर्यिका विज्ञानमती माताजी ने श्री दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय उदयनगर में अपने प्रवचन में बुंदेलखंड की वसुंधरा का गुणानुवाद करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की माटी के कण-कण में, उसकी हवाओं में धर्म है। वहां के लोग साधुओं की सेवा, चर्या को व्यवस्थित करने के लिए पूर्णतः सक्षम एवं निपुण हैं और उसकी अनुपालन भी करते हैं। आपने वहां के श्रावकों की भी इस बात के लिए प्रशंसा की कि वे अपने बच्चों को धर्म मार्ग पर आगे बढ़ने की सदैव प्रेरणा देते रहते हैं, यही कारण है कि आज श्रमण संस्कृति का अनुपालन करने वाले सर्वाधिक त्यागी वृति और मुनियों, आर्यिकाओं की भूमि है बुंदेलखंड की वसुंधरा। विज्ञानमती माताजी ने आगे कहा कि जिन घरों में माता-पिता बहुत धर्म करते हैं और जिनेंद्र भगवान की वाणी को श्रवण करने के उत्सुक होते हैं। ऐसे घरों में उनके बच्चे कई दिनों तक मंदिर भी नहीं जाते, पूजन ,अभिषेक भी नहीं करते एवं उनके नगर में आए उत्कृष्ट साधुओं के दर्शन भी करने नहीं जाते। कई बार अभी देखा गया है कि घर के अंदर साधुओं के आहार हो रहे हैं और बच्चा ऊपर बेडरूम में चादर ओढ़ कर सो रहा है। ऐसा लाभ अंतराय कर्म के उदय से होता है।

शहर के लोगों में उत्साह

राजेश जैन दद्दू ने संस्कार संयत सांस्कृतिक चातुर्मास समिति के सौजन्य से बताया कि माताजी के प्रभावशाली प्रवचन श्रवण के लिए शहर के लोगों में काफी उत्साह है प्रतिदिन शहर भर से उनके प्रवचन सुनने काफी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष वर्ग समय पर उपस्थित हो जाते हैं। धर्मसभा की विशेषता यह है कि प्रवचन ठीक 8:30 पर प्रारंभ होकर 9:30 पर समाप्त हो जाते हैं। धर्मसभा में माता जी के सानिध्य में चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं श्रीफल समर्पण आदि का कोई कार्यक्रम आयोजकों द्वारा नहीं कराया जाता है ताकि श्रोताओं को माता जी के प्रवचन श्रवण का पूरा लाभ प्राप्त हो सके।

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