परम पूज्य राष्ट्र हितैषी संत अभिक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महा मुनिराज की शिष्या आर्यिका वर्द्धस्वनंदनी माता जी के ससंघ का आगमन 25 मई को श्री दिगम्बर जैन मंदिर कालका जी में हुआ। पढ़िए हितेष जैन एडवोकेट की रिपोर्ट
परम पूज्य राष्ट्र हितैषी संत अभिक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महा मुनिराज की शिष्या आर्यिका वर्द्धस्वनंदनी माता जी के ससंघ का आगमन 25 मई 2024 को श्री दिगम्बर जैन मंदिर कालका जी में हुआ। श्री मन्दिर जी के प्रांगण में माताजी के समक्ष में श्री भक्तामर जी की कक्षा लगाई जा रही है। इस कक्षा में छोटे से बड़े सभी श्रावक श्राविका बड़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे है। इस कक्षा में माताजी द्वारा मधुर वाणी में प्रतिदिन श्री भक्तामर जी के एक एक श्लोक का अर्थ सहित उच्चारण एवं महत्व सिखाया जा रहा है।
माताजी ने प्रवचन में बताया कि जो व्यक्ति वर्तमान समय में जीता है वह हमेशा सुखी रहता है अथवा जो व्यक्ति भूतकाल एवं भविष्य की चिंता करता है तो वह हमेशा दुखी रहता है। सुखी रहने के लिए धर्म ध्यान ही एकमात्र मूल मंत्र है। इस धर्मसभा में छोटे छोटे बच्चे, महिलाएं व पुरुष उपस्थित होकर लाभांवित हो रहे हैं।













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