आर्यिकाश्री सुनयनमति माताजी का सनावद नगर में मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश रख माताजी की अगवानी की। माताजी ने बड़ा मंदिर सभागार में प्रबोधन दिया। वे यहां पर रोज सुबह इष्टोपदेश ग्रंथ की क्लास लेंगी। पढ़िए सनावद से सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावदः संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्यश्री सुंदरसागरजी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या आर्यिका 105 सुनयनमति माताजी ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। सन्मति काका ने बताया कि इंदौर में चातुर्मासरत आर्यिका माताजी श्री सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट से यात्रा कर नगर में पधारीं जहा सभी समाजजनों ने सुबह 8.30 बजे ओंकारेश्वर रोड रेलवे गेट पर पहुंचकर आर्यिका संघ की आगवानी की। इस अवसर पर सभी समाजजन जुलूस के रूप में श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में पहुंचे। जहां महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर आर्यिका संघ की आगवानी की।
यह नगर धर्म के क्षेत्र में वर्धमान होना चाहिए
बड़े मंदिर जी के हाल में समाजजनों को संबोधित करते हुए आर्यिका माताजी ने कहा की सनावद नगरी महा संयमी नगरी है। जहां से 18 साधु बने हैं। ये कोई छोटी बात नहीं है। नगर का सबसे बड़ा सौभाग्य तो यह है कि जो चरित्र में वर्धमान है, ज्ञान में वर्धमान है, वात्सल्य में वर्धमान है और जो समाधि करवाने में भी दक्ष है। शास्त्रों में उल्लेख है की वयोवृद्ध तीन प्रकार के होते हैं। पहला होता है ज्ञान वृद्ध, दूसरे होते हैं तप वृद्ध और तीसरे होते हैं वयोवृद्ध। ये तीनों प्रकार की उपाधियों से अलंकृत हैं। वो ज्ञान, तप, चरित्र से तपे ऐसे आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज की जन्म नगरी सनावद को होना बहुत ही गर्व की बात है। यह नगर धर्म के क्षेत्र में बहुत ही वर्धमान होना चाहिए। हम ऐसी भावना हम भाते हैं।
माताजी इष्टापदेश की क्लास लेंगी
आर्यिका माताजी द्वारा शाम को धार्मिक क्लास एवं आचार्य भक्ति गुरु भक्ति आरती एवं प्रश्न मंच आयोजित किए गए। आर्यिका माताजी द्वारा प्रतिदिन सुबह 8.30बजे से इष्टोपदेश ग्रंथ की क्लास ली जाएगी।













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