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आर्यिका श्री 105 अमोघमति माताजी का चौथा संयम दीक्षा दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया : गुरुदेव ज्ञेयसागर जी महाराज के उपकार को स्मरण कर माताजी ने किया कोटि-कोटि नमोस्तु निवेदित


मुरैना में आर्यिका श्री 105 अमोघमति माताजी का चौथा संयम दीक्षा दिवस अत्यंत श्रद्धा और भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया। माताजी ने इस अवसर पर अपने गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज एवं परंपरा आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के उपकारों को स्मरण करते हुए नमोस्तु निवेदित किया। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


मुरैना। दिगंबर जैन समाज के आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर आर्यिका श्री 105 अमोघमति माताजी का चौथा संयम दीक्षा दिवस 12 अक्टूबर को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। माताजी ने अपने पूज्य दीक्षा गुरु आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि गुरुदेव के उपकार शब्दों में नहीं समाए जा सकते। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि संयम का मार्ग कठिन जरूर है, लेकिन यह आत्मा के कल्याण और मोक्ष का सच्चा पथ है।

जानकारी के अनुसार, माताजी उत्तर भारत के प्रथम दिगंबराचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज छाणी परंपरा के षष्ट पट्टाचार्य आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की अंतिम दीक्षित शिष्या गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माताजी के संघ में साधना कर रही हैं। आर्यिका अमोघमति माताजी का जन्म लगभग 69 वर्ष पूर्व राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्राम बमरौली में दिगंबर जैसवाल जैन उपरोचियाँ परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री ग्याप्रसाद जैन और माता नत्थोदेवी जैन धार्मिक संस्कारों से संपन्न थे।

गृहस्थ जीवन में वे मुरैना निवासी श्री कैलाशचंद जैन साहुला परिवार में रहीं, जहां उन्होंने एक पुत्री और दो पुत्रों के साथ पारिवारिक जीवन को धार्मिकता से जोड़ा। धीरे-धीरे वैराग्य की भावना प्रबल हुई और उन्होंने सांसारिक मोह-माया को त्यागकर संयम का मार्ग अपनाने का निश्चय किया।

12 अक्टूबर 2021 को मुरैना नगर में आयोजित विशेष समारोह में उन्होंने सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज से दीक्षा ग्रहण की और अब गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माताजी के ससंघ सान्निध्य में अतिशय क्षेत्र रानीला (हरियाणा) में चातुर्मासरत हैं।

संयम की साधना ही जीवन का परम उद्देश्य 

इस अवसर पर आर्यिका अमोघमति माताजी ने कहा — “गुरुमां गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी के वात्सल्यमयी स्नेह और आशीष से साधना सहज और निरंतर चल रही है। उनके चरणों में रहकर संयम की साधना ही जीवन का परम उद्देश्य है।” मुरैना जैन समाज ने भी इस अवसर पर माताजी को श्रद्धापूर्वक नमन किया और दीक्षा दिवस की शुभकामनाएं अर्पित कीं। समाजसेवी कुशाल जैन साहुला ने कहा कि आर्यिका माताजी की संयम यात्रा समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस तरह आर्यिका श्री 105 अमोघमति माताजी का संयम दिवस आत्म साधना, श्रद्धा और गुरु भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया।

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