85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 8 दिसंबर को वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश निर्यापकाचार्य आचार्य श्री वर्धमानसागर जी, समक्ष श्रीजी, आचार्य श्रीसंघ सहित सभी साधुओं से क्षमायाचना कर संस्तरारोहण किया। उनके तप और त्याग की अनुमोदना की गई। पढ़िए पारसोला की यह खबर…
पारसोला। आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने 8 दिसंबर को वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश निर्यापकाचार्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, समक्ष श्रीजी, आचार्य श्रीसंघ सहित सभी साधुओं से क्षमायाचना कर संस्तरारोहण किया।
यह होता है संस्तरारोहण
क्षपक साधु जिस स्थान पर बैठते-लेटते हैं। उसे संस्तर कहते हैं और उस पर बैठना और उठना आरोहण कहलाता है। इस प्रकार संस्तरारोहण किया जाता है। क्षपकोतमा साघु जीवित अवस्था में संयमी जीवन में क्रम पूर्वक आहार का त्याग कर रही हैं। आर्यिका श्री तपनमति माताजी के तप, त्याग की अनुमोदना की गई।
आर्यिका श्री का परिचय
ब्रह्मचारी गज्जू भैया एवं राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि पौष शुक्ल दशमी विक्रम संवत 1991 को मथुरा देवी पिता लक्ष्मण जी के यहां जन्मी पानी देवी का जन्म कूण जिला उदयपुर में हुआ। आपका विवाह श्री भगवानदास लालावत से हुआ। आपने 11 अगस्त 2024 को पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से आर्यिका दीक्षा पारसोला में ग्रहण की।
आहार का किया त्याग
अभी आप एक दिन छोड़कर आहार में मात्र तरल पदार्थ ही ले रही हैं। तीनों प्रकार के आहार का त्याग कर दिया है। उल्लेखनीय कि आपकी पुत्री भारती ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 29 अप्रैल 2015 को आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर वर्तमान में आचार्य श्री के संघस्थ होकर आर्यिका श्री समर्पित मति के रूप में विद्यमान है।













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