रिषभ देव ने सैनिक को तलवार दी और साधु को पिच्छिका दी। यदि सैनिक को पिच्छिका दे दी होती तो आप जो घर में बैठकर धर्म ध्यान कर रहे हैं, व्यापार खेती बाड़ी के साथ ठाट से रह रहे है। ये संभव नहीं होता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी की धर्मसभा में मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने व्यक्त वक्त किए। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
थूवोनजी। रिषभ देव ने सैनिक को तलवार दी और साधु को पिच्छिका दी। यदि सैनिक को पिच्छिका दे दी होती तो आप जो घर में बैठकर धर्म ध्यान कर रहे हैं, व्यापार खेती बाड़ी के साथ ठाट से रह रहे है। ये संभव नहीं होता। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी की धर्मसभा में मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने व्यक्त वक्त किए। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन का अनेकांत तुम्हारी अवस्था को देखता है। अवस्था क्या है? ना पिच्छिका धर्म है ना तलवार धर्म है। अवस्था के अनुसार व्यवस्था की जाएगी। दुश्मन को पिच्छिका से नहीं रोका जा सकता दुश्मन को रोकने के लिए सैनिक के हाथ में बंदूक दी गई। तब ही तुम आज मंदिरों में बैठ कर धर्म कर रहे हो। इसमें सीमा पर तैनात सैनिकों का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आपको महसूस नहीं हो रहा। पहले जब राज तंत्र था तो राजा के समाप्त होते ही धर्म भी समाप्त हो जाता था। कभी-कभी मारना भी धर्म होता है। सैनिक की सभी जगह सद्गति कहीं क्योंकि, सैनिक के कारण देश सुरक्षित है।
युवा वर्ग और समन्वय ग्रुप ने भोजन व्यवस्था बेहतर की
क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के आगमन से पहले चक्रवर्ती यात्रा से ही श्री दिगम्बर जैन युवा वर्ग यहां भोजन की व्यवस्था के साथ आतिथ्य सत्कार में लगा है। वहीं समन्वय ग्रुप के साथियों ने शिलान्यास समारोह व शुद्ध भोजन व्यवस्था की दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी आपकी सेवा से अभिभूत होकर आपका अभिनन्दन कर रहे हैं। इस दौरान दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेन्द्र दद्दा, राजेन्द्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा सहित अन्य प्रमुख जनों ने जैन युवा वर्ग व समन्वय ग्रुप के सभी कार्यकर्ताओं का पीत वस्त्र पगड़ी मालाओं से स्वागत किया कर सम्मान किया।
यह निश्चित करना पड़ेगा तुम कौन हो तुम्हारी अवस्था क्या है
उन्होंने कहा कि तुम कौन हो तुम्हारी अवस्था क्या है। जब भी कोई शुभ कार्य होता है तो दीप प्रज्वलन से शुभारंभ किया जाता है। तुम दीप प्रज्वलन को शुभ मानते हो लेकिन, मुनिराज से तुमने आज तक पांच महीने एक बार भी दीप प्रज्वलन नहीं कराया। मंत्री आ गये कलेक्टर एसपी आ गये तो सब लोग उनसे दीप प्रज्वलन कराते हैं। हम तो सबसे बड़े अतिथि है लेकिन, विजय ने एक भी दिन मुझ से दीप प्रज्जवलित नहीं कराया। न ही अवस्था के अनुसार व्यवस्था बनना है। हम मुनि है हम दीप नहीं जला सकते आपको क्रोध करने की छूट है आपको हिंसा करने की छूट है लेकिन, आप कौन हो तुम सैनिक हो दिन भर सीमा पर सैनिक बंदूक लिए बैठा है फिर भी सैनिक को हिंसक नहीं कहा गया। बल्कि शहीद व राष्ट्र भक्त के नाम से जाना जाता है। हिंसा में भी धर्म मुनि महाराज से एक चींटी मर गई तो महापाप लगने के कारण प्रायश्चित लेना होगा, यही अनेकांत दर्शन है।
मंदिर में आप गंदगी करेंगे तो पाप लगेगा
मुनि श्री कहा कि अवस्था के अनुसार व्यवस्था बनाओ मंदिर में गंदे काम करेंगे तो उसको पाप लगेगा। वहीं कार्य पशु पक्षियों करने पर पाप नहीं लगता। पक्षी मंदिर में बीट कर देते हैं, उन्हें कोई पाप नहीं लगता लेकिन, यदि आप ने गंदगी कर दी तो महा दोष लगेगा। प्रातःकाल की बेला मंदिर जाने की है। जिस समय आपको पूजा अर्चना करने है। उस समय दूसरा काम करोगे तो उसमें सफलता नहीं मिलेगी। यदि सफल होना है तो समय को जिसे आप काल कहते हैं उसे सिद्ध करना होगा।
आप आर्य हो आप भारतीय हो तो आपको काल का ज्ञान होना चाहिये
मुनि श्री ने कहा कि किस समय कौन सा काम करना है आप आर्य हो आप भारतीय हो तो आपको काल का ज्ञान होना चाहिए। कालातीचार एक बड़ा अतिचार है। किसान का खेल है। बीज भी वही है। यदि सही समय पर बीज का वपन समय पर नहीं किया तो फ़सल नहीं आएगी। समय पर बीज को बोने पर फसल मिलेगी। इसलिए काल का ज्ञान होना चाहिये इससे भी काम नहीं चलेगा आप कौन हैं। आप मनुष्य है, धार्मिक दृष्टि नहीं है। आपको मानव पर्याय मिलीं है तो आपके क्या कर्तव्य है फिर आपकी अवस्था क्या है। एक बालक एक श्रावक है एक साधु है सब का भाव एक सा है लेकिन, आप कौन हैं उसके अनुसार ही आ रहा है।













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