महरौनी विकासखंड में स्थित भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर प्रागैतिहासिक नवागढ़ क्षेत्र के इतिहास एवं पुरातत्व के संदर्भ में डॉक्टर अर्पिता रंजन अधिकारी एएसआई दिल्ली के द्वारा किए गए शोध ग्रंथ ‘नवागढ़ अभिलेख एवं पुरातत्व’ का भारतीय ज्ञानपीठ दिल्ली ने प्रकाशन किया है। इस शोध ग्रंथ का लोकार्पण श्रीमद्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव दिल्ली में आचार्य श्री वसुनंदी महाराज के ससंघ सानिध्य में श्रेष्ठी पंकज जैन कृष्णा नगर द्वारा किया गया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
ललितपुर। नगर से 65 किलोमीटर दूर महरौनी विकासखंड में स्थित भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर प्रागैतिहासिक नवागढ़ क्षेत्र के इतिहास एवं पुरातत्व के संदर्भ में डॉक्टर अर्पिता रंजन अधिकारी एएसआई दिल्ली के द्वारा किए गए शोध ग्रंथ ‘नवागढ़ अभिलेख एवं पुरातत्व’ का भारतीय ज्ञानपीठ दिल्ली ने प्रकाशन किया है। इस शोध ग्रंथ का लोकार्पण श्रीमद्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव दिल्ली में आचार्य श्री वसुनंदी महाराज के ससंघ सानिध्य में श्रेष्ठी पंकज जैन कृष्णा नगर द्वारा किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांसकुमार जैन बड़ौत, महामंत्री ब्र. जय कुमार निशांत, संयुक्त मंत्री पंडित विनोद जैन रजवास एवं डॉ. ज्योति खतौली के साथ प्रकाश राय आरा बिहार, भारतीय पुरातत्व विभाग एवं भारतीय पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. अमरेंद्र सिंह, ब्र. अनीता दीदी, ब्र. मंजुला दीदी, ललिता दीदी के साथ कई विद्वान एवं श्रेष्ठी मौजूद थे।
बना प्राचीन संस्कृति एवं इतिहास का केंद्र
पंचायत समिति के अध्यक्ष अचल जैन, मंत्री संजय जैन गौरव जैन, रवि गुरु एवं पंचकल्याणक महिला समिति के पदाधिकारियों ने सभी का सम्मान किया।
दिल्ली में आयोजित लोकार्पण समारोह के मौके पर नवागढ़ तीर्थक्षेत्र एवं नवागढ़ गुरुकुलम के निदेशक ब्र. जय कुमार निशांत भैया ने कहा कि प्रागैतिहासिक पुरा सम्पदा सम्पन्न श्री दिगम्बर जैन प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ (ललितपुर) आज प्राचीन संस्कृति एवं इतिहास के केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। सुप्रसिद्ध नवागढ़ जैन तीर्थक्षेत्र क्षेत्र जहां प्राचीन पुरातात्विक संपदा, चंदेल कालीन बावड़ी एवं कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं हजारों वर्ष प्राचीन शैलचित्रों की संस्कृति एवं रॉक कट इमेज, चरण चिह्न पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। लगातार अन्वेषण से कई विशेष रहस्य निरंतर उदघाटित हो रहे हैं।

अनेक तथ्यों को किया उद्घाटित
व्याख्यान वाचस्पति डॉ. श्रेयांस जैन बड़ौत ने कहा कि इस महत्वपूर्ण श्रमसाध्य अनुसंधान कार्य में शोधार्थी अर्पिता रंजन ने साक्ष्यों के आधार पर नवागढ़ के संबंध में अनेक तथ्यों को उद्घाटित किया है। इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने में क्षेत्र के निर्देशक ब्र. जय निशांत भैया जी नवागढ़ तीर्थक्षेत्र कमेटी के साथ निरंतर प्रयासरत हैं। नवागढ़ कमेटी के प्रचार मंत्री डॉ सुनील संचय ने बताया कि नवागढ़ के पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण धरोहर भवन पुरालेख अनुभाग नई दिल्ली में सहायक अधीक्षण पुरालेखविद पद पर कार्यरत अर्पिता रंजन दिल्ली ने ‘नवागढ़ से प्राप्त संस्कृत अभिलेख एवं पुरातात्विक साक्ष्यों का समीक्षात्मक अध्ययन’ विषय पर अनुसंधान कार्य कर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के मानविकी संकाय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने यह महत्वपूर्ण शोध प्रबंध डॉ. श्रीप्रकाश राय आचार्य एवं अध्यक्ष संस्कृत विभाग वीर कुंवर सिंह विश्विद्यालय आरा के निर्देशन में पूर्ण किया है। इस शोध ग्रंथ को भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है।
वसुनंदी जी ने प्रदान किया आशीर्वाद
इतिहास विधाओं के शोधकर्ताओं के अलावा पर्यटन, सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक धरोहर एवं बुंदेलखंड की सभ्यता के विकास में रुचि रखने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए नवागढ़ एक विलक्षण तीर्थ,कला तीर्थ, धर्म तीर्थ है, जहां उनके अन्वेषण हेतु विशेष सामग्री उपलब्ध है। इस अवसर पर आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ने अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।













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