बस्सी (सलूंबर) उदयपुर-बांसवाड़ा मार्ग पर पहाड़ी पर स्थित प्राचीन श्री आदिनाथ जिनालय परिसर में गुरु मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण में आ रही अड़चन को दूर करने की अपील समाजजनों से की गई है। बस्सी से पढ़िए, गजेंद्र कुमार भादावत की यह रिपोर्ट…
बस्सी। बस्सी (सलूंबर) उदयपुर-बांसवाड़ा मार्ग पर पहाड़ी पर स्थित प्राचीन श्री आदिनाथ जिनालय परिसर में गुरु मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण में आ रही अड़चन को दूर करने की अपील समाजजनों से की गई है। उल्लेखनीय है कि बस्सी (सलूंबर) उदयपुर-बांसवाड़ा मार्ग पर पहाड़ी पर स्थित प्राचीन श्री आदिनाथ जिनालय जहां पर वर्ष 2015 में सर्वप्रथम आचार्य श्री समता सागर जी महाराज द्वारा चातुर्मास कर भक्तामर के 48 दिवसीय उपवास की तप साधना कर इस क्षेत्र को प्रकाश में लाए थे।
पश्चात् आचार्य श्री रयण सागर जी महाराज (सागवाड़ा) ने वर्ष 2018 का चातुर्मास इस क्षेत्र पर किया एवं उनकी ही प्रेरणा एवं आशीर्वाद से नितिन भैया (सीपुर) ने इस क्षेत्र का काफी विकास किया लेकिन, वर्ष 2020 में आनंदपुर कालू में आचार्य श्री रयण सागर जी महाराज का समाधि मरण हो गया। नितिन भैया के मन में यह भावना जागृत हुई कि आचार्य श्री की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से इस क्षेत्र पर काफी विकास हुआ है। अतः यहां गुरु मंदिर बनाकर गुरु प्रतिमा विराजमान की जाए। वर्ष 2022 में बस्सी क्षेत्र पर गुरु मंदिर का भव्य शिलान्यास हुआ था एवं संघस्थ ब्र. निर्मला दीदी की प्रेरणा से एकत्रित धनराशि से नितिन भैया की देखरेख में लगभग 40 प्रतिशत निर्माण कार्य हुआ।
इसके बाद द्रव्य की अड़चन होने एवं नितिन भैया की अस्वस्थता की वजह से गुरु मंदिर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। कहते हैं कि भाग्य से ज्यादा एवं समय से पहले कुछ होता नहीं है। अब सभी गुरु भक्तों के लिए शुभ समय आया है। जिससे गुरु मंदिर का रुका कार्य तीव्र गति से गुरु भक्त कमल सारगिया, बाहुबली कॉलोनी, बांसवाड़ा के अथक प्रयास से नितिन भैया के अस्वस्थ होने के कारण उनकी सहमति से स्थानीय समाज पंच महानुभावों की देखरेख मे पुनः प्रारंभ हो चुका है। इस गुरु मंदिर निर्माण में पूर्व में लगभग 20 लाख रुपए अभी तक खर्च हो चुके हैं। जिसमें गुरु महाराज की बहुत ही सुंदर एवं मनोज्ञ प्रतिमा भी बनकर क्षेत्र पर आ चुकी है। शेष कार्य के लिए लगभग 15 लाख रुपए की और आवश्यकता है। तभी यह कार्य पूर्ण हो सकेगा।
गुरु के आशीर्वाद से अपने को बहुत कुछ, सबकुछ मिला है। जब गुरु थे तो सभी अपनी छोटी-मोटी कठिनाई में भी उनके पास दौड़-दौड़ कर जाते एवं उनके समाधान एवं गुरु आशीर्वाद से आप के सभी के सभी कार्य, मनोरथ पूरे होते थे। यह आप सभी की भी मान्यता रही है। अब बारी आई है। अपने आप को सच्चा गुरु भक्त साबित करने की एवं गुरु के लिए समर्पण की एवं गुरु के आशीष का कर्ज चुकाने की। अतः आप सभी गुरु भक्तजनों से विनम्र निवेदन है गुरु मंदिर निर्माण में अपनी चंचला लक्ष्मी का समर्पण कर गुरु आशीष कर्ज का कुछ अंश कम कर पुण्यार्जन करें एवं निर्माण कार्य में आ रही धन की कमी को पूरा कराएं।
साथ ही श्री क्षेत्र बस्सी पर पधार कर स्वयं अवलोकन कराएं। सभी सीपुर भक्त परिवारों से भी विनम्र निवेदन है कि आप भी इस गुरु मंदिर निर्माण में अपना यथा योग्य समर्पण कर परम गुरु भक्त एवं सभी के श्रद्धावनत् नितिन भैया के द्वारा भाई भावना को पूर्ण करवाएं। पूर्व में जिन भक्तजनों ने इस गुरु मंदिर निर्माण में योगदान किया है, उनसे भी हाथ जोड़ कर आग्रह है, कि संभव हो तो इस कार्य के लिए कम ज्यादा राशि जो भी हो ओर समर्पण कराएं ताकि अपने द्वारा पूर्व में दिए योगदान का प्रतिफल स्वयं अपने सामने ही अपन देख सकें। गुरु मंदिर निर्माण के पश्चात् गुरु प्रतिमा प्रत्ष्ठिापन कार्यक्रम मे आचार्य श्री के प्रथम दीक्षित शिष्य आचार्य श्री मयंक सागर जी महाराज ससंघ के पधारने की संभावना है। मंदिर निर्माण में योगदान राशि के लिए ब्र. निर्मला दीदी से संपर्क करने का कष्ट करें।













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