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संतों के परिवार में एक और दीक्षार्थी का पुण्य हुआ प्रबल 8 जून को उदयपुर में होगी क्षुल्ल्क दीक्षा


दीक्षार्थी सुरेंद्रकुमार जीरभार की दीक्षा 8 जून को होगी। आचार्य कल्प पुण्य सागर महाराज दीक्षा प्रदान करेंगे । दीक्षा कार्यक्रम उदयपुर के हुमड़ भवन में होगा। संपादक रेखा जैन की विशेष प्रस्तुति ….


इंदौर /उदयपुर । मप्र के सनावद के समीपवर्ती गांव जीरभार निवासी दीक्षार्थी सुरेंद्रकुमार जीरभार की क्षुल्लक दीक्षा 8 जून को उदयपुर के हुमड़ भवन में होगी। यह पहला अवसर है जब एक ही परिवार में साधु-संतों ने संयम मार्ग को चुना और दीक्षाएं लेकर जैन धर्म की पताका को बुलंद कर संस्कार और संस्कृति को स्थापित करने का दायित्व निभाया। यह परम सौभाग्य की बात है कि इसी परिवार में एक और दीक्षा होने जा रही है।दीक्षार्थी के छोटे   सौरभ जैन ने बताया कि दीक्षार्थी सुरेंद्रकुमार जैन जीरभार ने श्रुत पंचमी के दिन उदयपुर के सेक्टर 4 में आचार्य कल्प श्री पुण्यसागर जी महाराज को श्रीफल भेंट कर दीक्षा के लिए निवेदन किया।

इसके अगले दिन उन्होंने बिजोलिया में विराजित आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज क्षुल्लक दीक्षा के लिए आशीर्वाद लिया। यहां पर विराजित संघ और समाजजनों ने आचार्यश्री के आशीर्वाद से सुरेंद्र कुमार की गोद भराई का कार्यक्रम किया। समाजजनों ने उनके संयम मार्ग को अपनाने के लिए अनुमोदना की। सौरभ जैन ने बताया कि सुरेंद्र कुमार जैन जीरभार को  क्षुल्लक दीक्षा आचार्यश्री पुण्यसागरजी महाराज  प्रदान करेंगे। आचार्य श्री शांति सागर जी की पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश श्री अजित सागर जी महाराज शिष्य एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज के कर कमलों से दीक्षार्थी सुरेंद्रकुमार जीरभार (क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी के गृहस्थ पिताजी) को दीक्षा प्रदान की जाएगी। समाजजनों का आह्वान किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इसके साक्षी बनें और धर्मलाभ लें।

सुरेंद्रकुमार जीरभार के परिवार में इन्होंने ली है अब तक  दीक्षा

मुनिश्री अर्पित सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रशस्तसागर जी महाराज, अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज, पूज्य आर्यिका श्री विनितमति, माताजी,आर्यिका श्री सुदृढ़मति जी माताजी, समाधिस्थ मुनिश्री अमेय सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री महोदयसागर जी महाराज ने दीक्षा ग्रहण कर संयम मार्ग को अपनाया है।

2015 में लिया था ब्रह्मचर्य का व्रत

सुरेंद्रकुमार जैन जीरभार ने वर्ष 2015 में आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत का प्रण लिया था। उन्होंने श्रुत पंचमी विगत शनिवार को दो प्रतिमा के व्रत लिए। सुरेंद्रकुमार ने आजीवन रात्रि भोजन का त्याग कर रखा है। वे आरंभ से ही संघों में जाकर मुनिश्री और आचार्यश्री की सेवा में लगे रहते थे। उनका यह कर्म नित जारी है। 1997 से ही उन्होंने संघों में जाना आरंभ किया था। वे आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज के संघ से अधिक समय से जुड़े हुए हैं।

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