समाचार

भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव पर साधुओं का वार्षिक प्रतिक्रमण : विधिपूर्वक चार माह तक रुकने का जो संकल्प लिया था उस चातुर्मास का होगा निष्ठापन 


नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित अन्य साधुओं का सोमवार को चातुर्मास की अंतिम चतुर्दशी पर मौन के साथ उपवास रहा। भोपाल से पढ़िए, यह खबर…


 भोपाल (अवधपुरी)। नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित क्षुल्लक श्री आदरसागरजी,क्षुल्लक श्री समादरसागर जी,क्षुल्लक श्री चिद्रूपसागर जी,क्षुल्लक श्री स्वभावसागर जी, क्षुल्लक श्री सुभगसागरजी महाराज का सोमवार को चातुर्मास की अंतिम चतुर्दशी पर मौन के साथ उपवास रहा। ज्ञातव्य रहे कार्तिक बदी त्रयोदशी को भगवान महावीर योग निरोध कर चुके थे एवं पावापुरी के सरोवर में कमल आसन पर कार्तिक अमावस्या को प्रातःकालीन बेला में निर्वाण पद की प्राप्ति हुई थी एवं संध्याकाल में उनके प्रथम गणधर गौतम स्वामी को केवल्य ज्ञान प्राप्त हो गया था। मुनि श्री ने कहा कि जैसे आप लोगों ने धूमधाम के साथ चार माह पूर्व चातुर्मास की स्थापना की थी। उसी उत्साह के साथ पूरी जैन समाज चातुर्मास निष्ठापन में भी भाग लें। आप सभी अपने-अपने जिनालयों में ऐसी व्यवस्था बना लें कि सभी 9 बजे तक अवधपुरी आ सके और भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव सामूहिक रूप से मना सकें।

अवधपुरी में निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाएगा

प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया वार्षिक प्रतिक्रमण के साथ आज चतुर्दशी को संघ का उपवास रहा। विद्याप्रमाण गुरुकुलम् एवं विद्यासागर इंस्टीट्यूट के समस्त पदाधिकारियों तथा चातुर्मास मंगल कलश के चक्रवर्ती एवं सभी नवरत्न परिवार ने भोपाल के सभी दिगंबर जैन मंदिर एवं पंचायत कमेटी के सभी सदस्यों से मंगलवार को प्रातःकाल भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव शुरू हो जाएगा एवं ठीक नौ बजे अवधपुरी में निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाएगा। आप सभी ने जैसा सहयोग चातुर्मास स्थापना पर दिया था। उसी अनुरूप सभी समाज बंधुओं के समक्ष विधिपूर्वक चार माह तक रुकने का जो संकल्प लिया था। उस संकल्प का विधिपूर्वक निष्ठापन कार्तिक अमावस्या को होगा।

निर्वाण लाड़ू बनाते समय शुद्धता का ध्यान रखे

मुनि श्री ने निर्वाण लाड़ू बनाते समय शुद्धता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आजकल श्रम बचाने के लिए बाजार का रेडीमेड लाड़ू आर्डर कर देते हैं। उन्होंने सभी मंदिर कमेटियों को निर्देशित किया कि अशुद्धि पूर्वक बना लाडू चढ़ाने योग्य नहीं होता और जो देर द्रव्य से बना लाडू है वह सिर्फ चढ़ाने के लिए ही काम में लें। आजकल मंदिर कमेटियां बूंदी के जो लाड़ू बनवा रही है, उनको भी इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मनुष्य श्रमशील रहेगा तो जीवंतता और ताजगी बनी रहेगी

मुनि श्री ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रवचन या धर्मोपदेश भगवान की वाणी के अनुरुप होना चाहिए। धर्मोपदेश में आकर्षण लाना बुरी बात नहीं लेकिन, उस आकर्षण में उसकी मौलिकता खंडित नहीं होना चाहिए।

मुनि श्री ने वर्तमान समय में मशीनरी करण पर भावना व्यक्त करते हुए कहा कि मनुष्य जब तक श्रमशील रहेगा उसमें जीवंतता और ताजगी बनी रहेगी। आजकल घंटों का काम मिनटों में होने लगा है। लाखों का काम एक ही व्यक्ति कर रहा है। वह भी कुछ पलों में हालांकि यह जो चीजें है। वह समय गत बदलाव है। इस विषय पर कहने से कुछ नहीं होगा लेकिन, इस बात पर सभी का ध्यान आकर्षित होना चाहिए कि इससे मनुष्य श्रम शून्य होकर जड़ता को प्राप्त होगा।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page