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विदेशी संग्रहालयों में संग्रहित हैं आदिनाथ भगवान प्राचीन प्रतिमाएं: हमारा सांस्कृतिक वैभव विदेशियों को सदियों से लुभाता रहा


भारत की सांस्कृतिक और पुरामहत्व की प्रतिमाओं को विदेशियों ने अपने यहां संग्रहालय में रखा हुआ है। इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। कई प्रतिमाएं तो अद्भुत शिल्प का नमूना हैं। जिन्हें देखने भर से अपार संतोष होता है। इंदौर से पढ़िए ओम कीर्ति पाटोदी की यह खबर…


इंदौर। भारत का सांस्कृतिक वैभव विदेशियों को सदियों से लुभा रहा है। इसमें प्राचीन मंदिर का वैभव, विशाल किले, प्राचीन गुफा मंदिर, शैल चित्र, ताड़पत्रों पर लिखा गया आध्यात्मिक ज्ञान शामिल है। यही चीजें भारतीय भू-भाग को विश्वविख्यात करता आ रहा है। मंदिर, किले तो वे उठाकर ले जा नहीं सकते थे। उन्होंने जब भी मौका मिला यहां की प्राचीन मूर्तियां, हस्त लिखित शास्त्रों को अपने देश में ले जाकर संग्रहित कर लिया। विदेशी संग्रहालयों में जैन तीर्थंकरों की देवी-देवताओं की हजारों प्रतिमाएं प्रदर्शित हैं। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि हम इस कालखंड के प्रारंभ में हुए आदि तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ स्वामी जी की विदेशी संग्रहालयों में मौजूद दर्जनों प्राचीन प्रतिमाओं में से कुछ प्रतिमाओं की जानकारी यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।

यहां-यहां संरक्षित हैं भगवान आदिनाथ की प्रतिमाएं 

उड़ीसा से प्राप्त गंग युगीन आदिनाथ भगवान की यह प्रतिमा म्यूजियम (पेरिस) में संग्रहित हैं। दिगंबर अवस्था में खड्गासन इस प्रतिमा में केश विन्यास को सुंदर रूप से जटाजूट के रूप में शिल्पित किया गया है। ऐसी ही एक प्रतिमा लंदन के संग्रहालय में भी संग्रहित हैं। जिसमें केशावलियां कंधों पर लहरा रही है। एक अति प्राचीन आदिनाथ भगवान की मथुरा से प्राप्त प्रतिमा जो विक्टोरिया एंड एलबर्ट म्यूजियम लंदन में है। कायोत्सर्ग दिगंबर मुद्रा की इस प्रतिमा का शीर्ष भाग खंडित है। यह प्रतिमा लगभग दो हजार वर्ष प्राचीन है। इसी तरह ऐसे कई विदेशी संग्रहालय हैं। जहां ऋषभदेव की कई ऐतिहासिक महत्व की प्रतिमाएं प्रदर्शित हैं।

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