मार्दव का मतलब है अहंकार / घमंड को त्यागना और विनम्रता और कोमलता को अपनाना। उत्तम मार्दव धर्म लोक व्यवहार को सुधारने के काम आता है, ये भावनाओं को भी नियंत्रित करता है। आदमी रोग से कम मरता है, मान के कारण ज्यादा मरता है ।उक्त प्रेरणास्पद उदगार छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। पढ़िए सतीश जैन की रिपोर्ट…
इंदौर। मार्दव का मतलब है अहंकार / घमंड को त्यागना और विनम्रता और कोमलता को अपनाना। तत्वार्थ सूत्र में एक सूत्र आता है वो कहता है कि आपको जो मनुष्य पर्याय मिली हैं , आप जो संघी पंचेंद्रीय मनुष्य बने हो , निश्चित ही आपके स्वभाव में मृदुता रही होगी। मनुष्य पर्याय मिली, मृदुता के कारण और बाद में पैदा हुआ मान। छोटे-छोटे बच्चों में भी मान रहता है। छोटा बच्चा कुछ नहीं समझता। खाना, सोना , जाना ये तीन चीज़ें उसे आती है। यदि मां का भाव खराब है, तो बच्चा दूध नहीं पीता। यदि आप उसे बोतल से भी जबरदस्ती दूध पिलाते हो तो वह 1 मिनट में दुध का दही बनाकर बाहर कर देता है। उत्तम मार्दव धर्म लोक व्यवहार को सुधारने के काम आता है, ये भावनाओं को भी नियंत्रित करता है। इसको धर्म मत कहिए, इसको आवश्यकता कहिए।
आपने कहा कि आदमी रोग से कम मरता है, मान के कारण ज्यादा मरता है । विश्व में युद्ध होता है तो केवल मान के कारण ही होता है। अगर आपका बच्चा नहीं सुनता है तो गुस्सा आना वाजिब है, डांटना आपका कर्तव्य है, किंतु बच्चों को टॉर्चर मत करिए । तेज आवाज की बातें काम नहीं करती।
मुनिश्री ने कहा कि अहंकारी व्यक्ति हमेशा परेशान रहता है, गुस्से में उसका उसके शरीर का खून पानी बनने लग जाता है। अहंकार हमें आपस में इकट्ठा नहीं होने देता। कोई भी पति-पत्नी 100% गलत नहीं होते मात्र पांच प्रतिशत गलती की वजह से तलाक हो रहे है। जबकि आपकी 95% प्रतिशत शौच एक सी होती है। आज से आपको काम ही ऐसा करना है जो मृदु हो। संकल्प ले कि आज से अपने परिवार में किसी को भी टॉर्चर नहीं करेंगे और अहंकार को छोड़कर मार्दव को अपनाएंगे।
समाज के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आज प्रातः गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के बाद गुरुदेव की आठ द्रव्यों से सभी शिविरार्थियों ने पूजन की। आचार्यश्री की पूजन के पश्चात 9:00 बजे से मुनिश्री के प्रवचन हुए। आज प्रातः 5:00 बजे से ही मांगलिक क्रियाएं प्रारंभ हो गई थी। पूज्य मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी ने भी अपने आशीर्वचन दिए ।
यह भी मौजूद रहे
इस अवसर पर मनोज बाकलीवाल, मनीष नायक,सतीश डबडेरा, सतीश जैन, आनंद जैन,कमल अग्रवाल , अमित जैन, शिरीष अजमेरा , भूपेंद्र जैन, आलोक बंडा , प्रदीप स्टील, रितेश जैन के साथ ही बहुत अधिक संख्या में समाजजन मौजूद थे। धर्म सभा का सफल संचालन ब्रह्मचारी मनोज भैया ने किया।













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