गिरनार पर्वत पर 2 जुलाई को एक इतिहास दिगंबर जैन समाज इतिहास रचने जा रहा है। इस दिन 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ का मोक्ष कल्याणक पर्व पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ तीर्थ क्षेत्र गिरनार पर्वत पर मनाया जाएगा। इस अवसर पर मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने संपूर्ण जैन समाज से आह्वान किया कि इस अवसर पर कम से कम एक लाख जैन श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र गिरनार पहुंचे और प्रभु नेमीनाथ भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाकर पर्वत राज की पुण्यभूमि को नमन करें। इंदौर से पढ़िए, राजेश जैन दद्दू की खबर…
इंदौर। गिरनार पर्वत पर 2 जुलाई को एक इतिहास दिगंबर जैन समाज इतिहास रचने जा रहा है। इस दिन 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ का मोक्ष कल्याणक पर्व पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ तीर्थ क्षेत्र गिरनार पर्वत पर मनाया जाएगा। इस अवसर पर मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने संपूर्ण जैन समाज से आह्वान किया कि इस अवसर पर कम से कम एक लाख जैन श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र गिरनार पहुंचे और प्रभु नेमीनाथ भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाकर पर्वत राज की पुण्यभूमि को नमन करें। विश्व जैन संगठन इंदौर के मंयक जैन ने कहा कि गिरनार वही तपोभूमि है जहां भगवान नेमीनाथ ने कठोर तप साधना कर मोक्ष पाया था। पिछले कुछ वर्षों से वहां जैन समाज से दर्शन और पूजन का अधिकार छीन लिया गया। वहां जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ निरंतर मारपीट की जाती है। इसलिए इस आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि 2 जुलाई बुधवार को गिरनार पर्वत पर भारतीय सेना या फिर अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की जाए, ताकि लाखों श्रद्धालुजन निःसंकोच और सुरक्षित रूप से भगवान नेमीनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू समर्पित कर अपनी भक्ति कर सकें।
जैन समाज के विश्व जैन संगठन एवं अनेक संगठन इसकी सफलता के लिए सक्रिय रूप से तैयारियां कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों से यात्राएं की जा रही हैं। जिसमें प्रमुखता से विश्व जैन संगठन और संजय जैन दिल्ली से लगभग 3 माह पैदल चल कर गिरनार पहुंच रहे हैं। इंदौर से भी हजारों की संख्या में समाजजन पहुंच रहे हैं।













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