कैलीग्राफी में णमोकार मंत्र से बनाई भगवान महावीर की इस आकृति को नया रूप दिया देश के एकमात्र अक्षर आर्टिस्ट और अक्षर सम्राट जैन कमल ने, जब वह मात्र 11 वर्ष के थे। अब तक लगभग 50 करोड़ लोग इनकी इस कला को देखकर अभिभूत हो चुके हैं। हैदराबाद से स्वाति जैन की यह खबर…
हैदराबाद। क्या आप सोच सकते हैं कि 11 साल का एक बच्चा खेल-खेल में अक्षरों से एक ऐसे आध्यात्मिक रेखांकन करे कि वो गूगल पर सबसे ज्यादा देखा जाने वाला रेखाचित्र बन जाए। जी हां, कैलीग्राफी में णमोकार मंत्र से बनाई भगवान महावीर की इस आकृति को नया रूप दिया देश के एकमात्र अक्षर आर्टिस्ट और अक्षर सम्राट जैन कमल ने, जब वह मात्र 11 वर्ष के थे। अब तक लगभग 50 करोड़ लोग इनकी इस कला को देखकर अभिभूत हो चुके हैं। कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। जैन कमल की भी अक्षरों की इस अनवरत यात्रा को पंख 11 साल की उम्र में ही मिल गए और इन्होंने अक्षरों से णमोकार मंत्र को चित्रित कर हमेशा के लिए गौरवशाली जैन धर्म के इतिहास को अपनी अमूल्य निधि से और भी गौरवान्वित कर दिया है। जैन कमल ने कपड़े पर भी णमोकार मंत्र से भगवान महावीर की इस विशेष आकृति को अक्षरों के कलापूर्ण संयोजन से सजाया है और यह कलाकृति राजगीर जैन मंदिर और पावापुरी जैन मंदिरों में लगी है। जिसे देखकर कोई भी संत,महात्मा और आम श्रावक कला के इस साधक की अक्षर साधना पर मोहित हुए बिना नहीं रहता।
गूगल पर सबसे अधिक देखा जाने वाला रेखांकन
बातचीत के दौरान अक्षर सम्राट जैन कमल ने बताया कि इनकी अक्षरों की यह यात्रा पिछले 50 वर्ष से अनवरत जारी है लेकिन, यह आकृति अनजाने में उकेरी गई थी। खुद जैन कमल को भी उस समय यह अहसास नहीं था कि यह आकृति गूगल पर सबसे अधिक देखा जाने वाला रेखांकन और जैन धर्म की अनमोल थाती बन जाएगा। आम लोगों के लिए यह णमोकार मंत्र की सिर्फ एक आकृति है लेकिन, जैन कमल के लिए यह एक ऐसी धरोहर है जिसके माध्यम से देश और विश्व की सारी समस्याओं का समाधान मिलता है और विश्व शांति का संदेश देता है। हाल ही में आचार्य श्री प्रमाण सागर जी और पद्म श्री विमल जैन ने इस कैलिग्राफी को देखकर जैन कमल के इस योगदान के लिए विशेष साधुवाद दिया। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी ने इन्हें अक्षर कलाकृति के सम्राट की उपाधि दी। देश के लिए इनके द्वारा दिए गए दूसरे बड़े योगदानों की बात करें तो देशभर में करोड़ों लोग हर दिन इनके डिजाइन किए अक्षरों को ही पढ़ते हैं और साठ से ज्यादा मैग्जीन और अखबारों के फ़ॉन्ट व मास्टहेड डिजाइन करने का कीर्तिमान अकेले जैन कमल के नाम है, जिनके लिए ये देश इनका हमेशा ऋणी रहेगा। वहीं जैन कमल आइआइएम और आइआइटी समेत देश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों में अक्षरों पर लेक्चर देकर युवा पीढ़ी को इस अक्षर यात्रा से जोड़ चुके हैं।













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