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सत्य पर सारे तप निर्भर जिससे ही पवित्र होती वाणी : आचार्यश्री निर्भय सागर जी ने सत्य धर्म का बताया मर्म 


दुनिया असत्य के पीछे जा रही है। सत्य की उपासना कर असत्य को त्यागना ही श्रेयस्कर बताते हुए पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर में पर्यूषण पर्व पर आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने व्यक्त किए। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…


ललितपुर। नम्रता और प्रिय वचन मनुष्य के आभूषण हैं। जिनके हृदय में सत्य का वास है, उसके हृदय में परमात्मा का वास रहता है। सत्य को सहन करना बहुत कठिन है, सत्य को समझाने की जरूरत है। दुनिया असत्य के पीछे जा रही है। सत्य की उपासना कर असत्य को त्यागना ही श्रेयस्कर बताते हुए पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर में पर्यूषण पर्व पर आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने व्यक्त किए। आचार्य श्री ने कहा कि सत्य की उपलब्धि क्रोध, मान, माया,लोभ, लालच आदि कषायों को छोडने पर ही होती है। सोच समझकर हित-मित प्रिय जैसा देखा सुना वैसा बोलना चाहिए। इस कलिकाल में सत्य थका-हारा, परेशान सा नजर आता है। परंतु सत्य न थक सकता है और न हार सकता है, न अस्तिस्य खो सकता है। उसकी परेशानी एक दिन चमक विखेरती है और विजय श्री को प्राप्त करती है।

सत्य हमेशा मधुर, शिव और सुंदर होता है

धर्म सभा का शुभारंभ श्रेष्ठीजनों ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया। प्रारंभ में तत्वार्थ सूत्र का वाचन आचार्य श्री संघ के सानिध्य में हुआ। प्रातःकाल आचार्य श्री के सानिध्य में मुनि शिवदत्त सागर महाराज ने सामायिक प्रतिकमण ध्यान के माध्यम से साधन एवं भावपूर्ण जिनवंदना की। अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदत्त सागर महाराज एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज के सान्निध्य में श्रावकों ने पर्वराज पर्यूषण पर्व पर प्रभु अभिषेक शांति धारा की। इस दौरान उन्होने कहा सत्य हमेशा मधुर, शिव और सुंदर होता है। उन्होंने कहा कि जिसके माध्यम से धर्म की रक्षा होती हो। प्राणियों का उपकार होता है। बिना पूछे ही बोलना और जहां आपका व अन्य का हित नहीं हो, वहां मौन ही रहना उचित कहा है। मध्यान्ह में तत्वार्थ सूत्र को आचार्य श्री ने श्रावकों को अपने चिन्तन द्वारा समझाया।

सत्य बलशाली होता है 

नगर के सभी जैन मंदिर आदिनाथ बड़ा मंदिर, चन्द्रप्रभु मंदिर डोडाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर में पहुंचकर श्रावकों ने प्रभु की पूजन अर्चन कर धर्मलाभ लिया। पार्श्वनाथ नया मंदिर में समवशरण विधान का विधान हुआ जिसमें श्रावको ने अर्घ समर्पित कर पुण्यार्जन किया। शाम को आरती के उपरान्त जैन अटामंदिर में धर्मसभा में ब्रहमचारिणी लवली दीदी ने कहा कि सत्य बलशाली होता है उसे सौ झूठ भले दवा लें लेकिन, वह उपर आए बगैर नहीं मानेगा। सत्य प्रतिष्ठित है सत्त्य एक अनुभूति है। सत्य वचन का पालन हर एक स्थिति में करना चाहिए। सत्य का पालन जिसने किया वह इस संसार से मुक्त हो गए।

मूकमाटी पर आधरित नाटिका का मंचन 

शाम को जैन मंदिरों में आरती शास्त्र प्रवचन के पश्चात पार्श्वनाथ अटा नंदिर में नंदा सुनंदा महिला संभाग के संयोजन में भजन प्रतियोगिता हुई जिसमें कविता जैन प्रथम, सजय जैन द्वितीय एवं प्रियंक टड़या तृतीय रहे। कार्यक्रम का संचालन महिला मंडल की प्रमुख अनीता मोदी ने किया। अभिनंनोदय तीर्थ में पाठशाला परिवार के बच्चों ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज द्वारा रचित मूकमाटी पर आधरित नाटिका का मंचन किया जबकि पार्श्वनाथ जैन नया मंदिर में जिनवाणी की दुर्दशा नाटिका का मंचन हुआ। इसके अतिरिक्त नगर के जैन मंदिरों में सायंकाल धर्मसभा के उपरान्त रोचक कार्यक्रमों के माध्यम से अपूर्व धर्मप्रभावना हो रही है।

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