समाचार

दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म मनाया: सनावद के संत निलय में भक्ति और आराधना की बही धारा 


श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर एवं संत निलय में दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म मनाया गया। जिसके तहत संत निलय में पंचामृत अभिषेक किया गया। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का उच्चारण किया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर एवं संत निलय में दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म मनाया गया। जिसके तहत संत निलय में पंचामृत अभिषेक किया गया। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का उच्चारण किया गया। शांतिधारा करने का सौभाग्य निमिष, नितिन मूलचंद जैन परिवार को मिला। उसके बाद सामूहिक पूजन, दशलक्षण धर्म पूजन ,उत्तम सत्य धर्म पूजन कर मनाया। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने उत्तम सत्य धर्म के बारे में कहा कि जीवन में असत्य कभी नहीं बोलना चाहिए।

बल्कि जो सत्य है, उसे धारण करना चाहिए। गीता में भी कहा गया है कि जब सत्य की असत्य से लड़ाई होगी तो सत्य अकेला खड़ा होगा और असत्य की फौज लंबी होगी क्योंकि, असत्य के पीछे मूर्खों का झुंड होगा। वक्त के साथ चलना कोई जरूरी नहीं, सच के साथ चलिए। एक दिन वक्त आपके साथ चलेगा। एक असत्य शब्द नर को नारकीय बना सकता है। हमें जीवन में असत्य नहीं बोलना चाहिए क्योंकि, झूठे व्यक्ति का कोई मोल नहीं होता है। उस पर कोई विश्वास नहीं करता है।

अहिंसा सत्य को सौंदर्य प्रदान करती है

मुनि विश्व सूर्य सागर जी महाराज ने कहा कि अहिंसा सत्य को सौंदर्य प्रदान करती है और सत्य अहिंसा की सुरक्षा करता है। अहिंसा रहित सत्य कुरूप है और सत्य रहित अहिंसा क्षणस्थायी है। सत्य बोलो और धर्म का आचरण करो। क्रोध, लोभ, भय और हँसी-मजाक आदि के कारण ही झूठ बोला जाता है। जहाँ न झूठ बोला जाता है, न ही झूठा व्यवहार किया जाता है वही लोकहित का साधक सत्यधर्म होता है। शाम को आचार्य भक्ति आरती भक्ति सभी समाजजनों के द्वारा की गई।

प्रतिभागियों को पुरस्कार का किया वितरण 

एक दिन पूर्व मुनि श्री विश्वसुर्य सागर जी महाराज के द्वारा निरन्तर ज्ञान को अभिवृद्धि के लिए बड़े मंदिर जी में प्रतिदिन ज्ञानमयी क्लास छह ढाला, तत्वार्थ सूत्र की ली जा रही है। जिसके प्रथम भाग की परीक्षाएं ली गई थी। जिसके परिणाम मुनि श्री द्वारा बताए गए। जिसमें प्रतिभागियों को कुटुम्ब आश्रय समिति द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए। अश्विनी चौधरी ने आभार माना।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page