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आगम हम सबका प्राण जीवन के समान इसकी रक्षा सेवा करें: आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के लिए किया विहार 


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 33 साधुओं सहित आदर्श नगर से मंगल विहार पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के लिए 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय पुरानी टोंक चतुर्भुज तालाब के पास हुआ। आदर्श नगर से मंगल विहार से पूर्व आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित किया। टोंक से पढ़िए, यह खबर…


टोंक। राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 33 साधुओं सहित आदर्श नगर से मंगल विहार पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के लिए 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय पुरानी टोंक चतुर्भुज तालाब के पास हुआ। आदर्श नगर से मंगल विहार से पूर्व आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म से प्रीति करना चाहिए। संत समागम से, प्रवचन से, दर्शन से, संघ की वैयावृति सेवा से यह प्रेरणा मिलती है। आत्म साधकों की सेवा निष्ठा पूर्वक करना करना चाहिए। धर्म से प्रीति आत्म साधक बनाती है। पंच परावर्तन में यह प्राणी चारों गति में भ्रमण कर रहा है। आर्तध्यान, रौद्र ध्यान से दुर्गति होती है। नर्क और त्रियंच गति में जाना होता है।

देव शास्त्र गुरु के माध्यम से धर्म को अपनाने से उन्नति संभव 

राजेश पंचोलिया और गजराज लोकेश के अनुसार आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि संत समागम से धर्म पुण्य का अवसर मिलता है। व्रत आचार्य चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर जी कहते थे कि आगम प्राण है। जिस प्रकार आप जीवन की रक्षा करते हो उसी प्रकार आगम की रक्षा सेवा करना चाहिए। राग द्वेष कषाय के कारण आत्मा मलीन होती है। इसलिए देव शास्त्र गुरु के माध्यम से धर्म को अपना कर धारण करने से जीवन में उन्नति होती है। चातुर्मास में छोटी उम्र के बालकों से लेकर प्रौढ़, वृद्ध श्रावक-श्राविकाओं और बालिकाओं ने संघ की सेवा, दर्शन, आहार दान, प्रवचन वृत्ति आदि की है। उन सबके लिए सभी को मंगल आशीर्वाद देते हैं कि जो संत समागम की सेवा वैयावृति आप सभी ने की है। वह निरंतर बनी रहना चाहिए।

दिव्यांश के अध्ययन की सराहना की आचार्यश्री ने 

चातुर्मास में किशोर दिव्यांश का जिक्र कर बताया कि उसमें धर्म की बहुत ललक थी। हमने अपने जीवन में पहली बार किसी श्रावक को अध्ययन कराया। सुबह 5 बजे से रात्रि भर रहता था। पहले उसने रत्नाकरण श्रावकाचार का अध्ययन किया। अभी द्रव्य संग्रह का अध्ययन कर रहा है।

यहां पर होने हैं पंच कल्याणक महोत्सव 

पंच कल्याणक समिति के ओमप्रकाश बाकलीवाल, प्रकाश सोनी, शैलेंद्र चौधरी, विक्रम एडवोकेट ने बताया कि आगामी 7 से 12 नवंबर तक पंच कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्री 1008 श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नसिया जी (श्याम बाबा) चतुर्भुज तालाब के पास पुरानी टोंक एवं ’श्री 1008 श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन नसिया जी तेरापंथीयान चतुर्भुज तालाब के पास पुरानी टोंक एवं चतुर्भुज तालाब परिसर एरिया इन जगहों पर संपूर्ण पंच कल्याणक महोत्सव की सभी क्रियाएं और कार्यक्रम संपन्न होंगे।

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