हरि पर्वत आगरा में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती 108 श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि माता-पिता बनने के बाद अपना रहन-सहन सब अपने कुल के अनुसार करें। पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट…
आगरा। हरि पर्वत आगरा में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती 108 श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि माता-पिता बनने के बाद अपना रहन-सहन सब अपने कुल के अनुसार करें। उन्होंने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गर्भस्थ शिशु जब पेट में आता है तो वह पूरे कैमरे के जैसे ध्यान रखता है। मां क्या भोजन कर रही है, क्या देख रही है, क्या सोच रही हैं। वह सब गर्भस्थ शिशु महसुस कर रहा है। यदि मां बनने के बाद माता पिता कोई गलती करते हैं तो उनको बड़ी सजा मिलती है। यदि मां ने गलत खाया तो बेटा भी वह कार्य करेगा देखा तो एक न एक दिन वह भी वह कार्य करेगा।
यदि किसी बेटे ने ऐसा कार्य किया जिससे माता पिता को दुख भोगना पड़े, मस्तक झुक जाए, शर्मिंदा हो जाए तो माता-पिता के अंदर ऐसा भाव आता है कि बेटा होने के बजाए तो निपुते रह जाते। इस प्रवचन के माध्यम से यही शिक्षा दी गई कि जो शादी कर रहे हैं, वे सोचें कि भगवान, गुरु को अभिषेक व आहार देने योग्य बने रहें।













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