आचार्य सुनील सागर जी महाराज के प्रयासों से अजमेर में दो गुटों में बंटा जैन समाज एक हो गया, देश भर मे इस कार्य को काफी सराहा भी गया। इसके बाद अब देश भर के समाजजन की निगाहें दो- तीन गुटों में बटें (सच कहें तो बांटे गये) इंदौर के जैन समाज की ओर हैं कि क्या इंदौर के उक्त गुट अपनी सत्ता अभिलाषा ,अपनी अकड़, अपना दिखावटी सम्मान की भावना को छोड़ कर समाज हित के लिए एक हो सकता है.. .पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। आचार्य सुनील सागर जी महाराज के प्रयासों से अजमेर में दो गुटों में बंटा जैन समाज एक हो गया, देश भर मे इस कार्य को काफी सराहा भी गया। इसके बाद अब देश भर के समाजजन की निगाहें दो- तीन गुटों में बटें (सच कहें तो बांटे गये) इंदौर के जैन समाज की ओर हैं कि क्या इंदौर के उक्त गुट अपनी सत्ता अभिलाषा ,अपनी अकड़, अपना दिखावटी सम्मान की भावना को छोड़ कर समाज हित के लिए एक हो सकता है.. क्या इंदौर का जैन समाज भगवान महावीर के बताये जियो और जीने दो के मार्ग पर चलने को तैयार है..
बात थोड़ी कड़वी जरूर है पर सच्ची भी है कि इंदौर के समाजजन तो आपस में एक है और उनमें जबरदस्त भाईचारा, मानवता और धार्मिक भावनाएं भी हैं किंतु जो चंद लोगों का समाज का नेता पक्ष है, वो अपनी सत्ता लोलुपता के लिए इन्हें आपस में लड़ाता है, गुटवाद चलाता है, अंग्रेजो की भांति फूट डालो शासन करो की रणनीति चला कर जैन समाज को गुट में बांटने का कार्य करता है। क्या वो चंद नेता लोग एक हो पाएंगे, यदि एक हो जाते हैं तो निश्चित ही एक अच्छा संदेश देश भर के जैन समाज को इंदौर के समाज से मिलेगा जो काफी सराहनीय होगा किंतु यदि अपनी हठधर्मिता के कारण ये गुट को एकजुट नहीं कर पाते हैं तो क्या भारत का जैन समाज इन्हें माफ करेगा, क्या इनकी आने वाली पीढ़ी समाजजन को बांटने का दर्द देने वाले अपने परिवारजन को इज्जत दे पायेगी…यह हम सभी को मिलकर सोचना है…













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