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37 साल बाद कुंभ राशि में पंचग्रही महासंयोग: इस महायोग में साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा 


ज्योतिष की दुनिया में खगोलीय हलचल चर अचर सभी पर असर कर हलचल मचा देती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि 37 साल बाद कुंभ राशि में राहु के साथ सूर्य, बुध, शुक्र चंद्रमा अर्थात पंचग्रही महासंयोग के साथ वलयाकार कंकण आकृति साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी मंगलवार को कुंभ राशि में होने जा रहा है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। ज्योतिष की दुनिया में खगोलीय हलचल चर अचर सभी पर असर कर हलचल मचा देती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि 37 साल बाद कुंभ राशि में राहु के साथ सूर्य, बुध, शुक्र चंद्रमा अर्थात पंचग्रही महासंयोग के साथ वलयाकार कंकण आकृति साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी मंगलवार को कुंभ राशि में होने जा रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में धार्मिक दृष्टि से ग्रहण का सूतक मान्य नहीं होगा।

इन जगहों पर दिखाई देगा ग्रहण

दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका, अंटार्टिका, हिन्दमहासगर, जिम्बाब्वे, जांबिया आदि में पूर्ण रूपेण कंकण आकृति दिखाई देगा।

कुंभ राशि में ग्रहों का जाल

इस बार अकेले सूर्य ही ग्रहण नहीं झेल रहे बल्कि राहु के साथ कुंभ राशि में सूर्य , चन्द्र, बुध, शुक्र ग्रह साथ है एवं गुरु पर राहु की दृष्टि है। इस तरह का ग्रहों का जाल ज्योतिषी गणना से बेहद संवेदनशील कहा गया है। ग्रहण की अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट होगी। भारतीय समय अनुसार ग्रहण का स्पर्श दोपहर 15.36 बजे मोक्ष 19.58 बजे होगा।

 2026 में कुल 4 ग्रहण 

जैन ने बताया कि सन् 2026 में कुल चार ग्रहण पड़ेंगे। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को भारत में अदृश्य है। दूसरा चंद्र ग्रहण 3 मार्च को भारत में दृश्य है। तीसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त हरियाली अमावस्या को भारत में अदृश्य है। चौथा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त भारत में अदृश्य है।

’सत्ता परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के संकेत 

जैन ने बताया कुंभ राशि में पंचग्रही महासंयोग के साथ सूर्य ग्रहण है, जो कई मायने में वैश्विक असर करेगा। सूर्य राहु की युति शनि एवं मंगल से पंचग्रही महासंयोग घिरा हुआ है, जो हिंसा, अग्नि युद्ध के हालातों के साथ वैश्विक राजनीति में तनाव नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप एवं धर्म गुरुओं पर धर्म संकट बढ़ेगा क्योंकि, गुरु ग्रह पर राहु की पंचम दृष्टि बवाल को बढ़ाएगी। भारत की राजनीति और धर्म गुरु भी इसकी बड़ी चपेट में रहेंगे। फिर कोई हवाई हादसा, तेज हवा के साथ फरवरी के आखरी मार्च के प्रथम सप्ताह में वर्षा और ओलो से फसलों को बड़ी हानि हो सकती है।

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