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जैन समाज पर विपत्ति आए तो सभी एक हो जाएं : उपाध्याय श्री विरंजन सागर के सानिध्य में हुआ अधिवक्ता सम्मेलन


जैन संत उपाध्याय श्री विरंजन सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में अधिवक्ता सम्मेलन जबलपुर में आयोजित किया गया।आज का सदन पूज्य गुरुदेव के मंगल प्रवेश से प्रारंभ हुआ। इस सत्र के दौरान मढिया जी जबलपुर के आराध्य मूलनायक भगवान पदमप्रभु के साथ-साथ आचार्य श्री विद्यासागर और आचार्य श्री विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


जबलपुर। जैन संत उपाध्याय श्री विरंजन सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में अधिवक्ता सम्मेलन जबलपुर में आयोजित किया गया।आज का सदन पूज्य गुरुदेव के मंगल प्रवेश से प्रारंभ हुआ। इस सत्र के दौरान मढिया जी जबलपुर के आराध्य मूलनायक भगवान पदमप्रभु के साथ-साथ आचार्य श्री विद्यासागर और आचार्य श्री विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। मंच का संचालन अनिल जैन सागर, डॉ. निधि जैन तारबाबू और एडवोकेट मनीष जैन ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एडवोकेट रश्मि ऋतु सागर ने सभी को उद्बोधन दिया। साथ ही पूज्य गुरुदेव के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट कर मंगल वाणी सुनने हेतु निवेदन किया। गुरुदेव ने प्रवचन के माध्यम से सभी वकील भाइयों को बताया कि हमारे तीर्थ क्षेत्र मंदिरों पर कब्जा की स्थिति दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जो वर्तमान स्थिति को ही नहीं, बल्कि भविष्य में पुरानी धरोहर संपदा को भी नष्ट कर रही है।

उन्होंने कहा कि “हम जैन समाज में इतने वकील और जज हैं, लेकिन कोई भी इस कार्य में अपना योगदान नहीं दे रहा है। यदि ऐसा चलता रहा तो हमारे तीर्थ मंदिर कुछ भी नहीं रहेंगे। इसके लिए हमें सबसे पहले अपनी मानसिकता को एक करना होगा और धर्म से जुड़ना होगा। साधुवाद और पंथवाद को खत्म कर हमें सिर्फ ‘जैन’ होना है और हमारी जैन समाज एक है।” गुरुदेव ने आगे कहा कि “अगर किसी जैन समाज पर कोई विपत्ति आती है, तो हम एक होकर खड़े होंगे। साधु तो एक मर्यादा के बंधन से बंधा होता है, लेकिन आप लोगों को किसी बंधन से बंधने की आवश्यकता नहीं है।”

सम्मेलन के अंत में सभी वकील भाइयों का सम्मान चातुर्मास सेवा समिति और पिसनहारी मढिया ट्रस्ट के द्वारा किया गया। सभी वकील भाइयों ने पूज्य गुरुदेव के समक्ष यह संकल्प लिया कि यदि आगे कभी भी तीर्थ क्षेत्र मंदिर या किसी जैन गरीब परिवार पर कोई आपत्ति आती है, तो हम कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़े रहेंगे। इसके लिए एक कमेटी गठित कर एक कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

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