श्री दिगंबर जैन समाज, झुमरीतिलैया के सानिध्य में दोनों श्री दिगम्बर जैन मंदिरों में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भावना से मनाया गया। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम हुए। पढ़िए जैन राज अजमेरा और नवीन जैन की रिपोर्ट…
झुमरीतिलैया। श्री दिगंबर जैन समाज, झुमरीतिलैया के सानिध्य में दोनों श्री दिगम्बर जैन मंदिरों में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भावना से मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर प्रथम अभिषेक अजय-प्रसम सेठी और अनिल-दीपाली पाटोदी के परिवार के द्वारा किया गया। इसके बाद समाज के सैकड़ों लोगों द्वारा रजत कलशों से महामस्तिकाभिषेक किया गया। वृहद शांतिधारा राजा सेठी, कमल गंगवाल के द्वारा की गई।
अभिषेक के बाद संगीतमय पूजा सुबोध गंगवाल के मुखारबिंद से कराई गई, जिसमें सभी भक्तों ने झूम-झूम कर एक- एक अर्घ्य श्रीजी के चरणों में समर्पित किया। इस अवसर पर समाज के मंत्री ललित सेठी ने कहा कि अनादिकाल से जैन धर्म चल रहा है। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने सभी को असि, मसि, कृषि आदि की शिक्षा देकर जीवनयापन सिखाया और भारत देश का नाम आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत के नाम से भारत देश पडा।

आदिनाथ भगवान का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ था, तब से हम सभी चैत्र कृष्ण नवमी को अयोध्या के साथ पूरे विश्व में जन्म कल्याणक महोत्सव भक्ति भाव के साथ मनाते हैं। जन्म कल्याणक महोत्सव से पहले संध्या में 48 दीपकों से भक्तामर पाठ अरुण-सिमा गंगवाल रांची के द्वारा हुआ। रात्रि में पालना झुलाने के साथ आरती और भजनों का कार्यक्रम हुआ।













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