परम पूज्य विज्ञान मति माताजी की शिष्या पवित्र मति माताजी का नौगामा नगर में चतुर्मास चल रहा है। चातुर्मास में आज प्रातः 1008 भगवान आदिनाथ मंदिर 1008 समवशरण मंदिर सखोदव तीर्थ में विशेष शांति धारा अभिषेक हुई। इसके उपरांत माताजी का मंगल प्रवचन हुआ। सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट…
नौगामा। परम पूज्य विज्ञान मति माताजी की शिष्या पवित्र मति माताजी का नौगामा नगर में चतुर्मास चल रहा है। चातुर्मास में आज प्रातः 1008 भगवान आदिनाथ मंदिर 1008 समवशरण मंदिर सखोदव तीर्थ में विशेष शांति धारा अभिषेक हुई। इसके उपरांत माताजी का मंगल प्रवचन हुआ। मंगल प्रवचन में माता जी ने कहा कि व्यसन करने से जीवन की दुर्गति होती है आजकल यह देखा जा रहा है कि युवा पीढ़ी बुरे व्यसन में लिप्त है जिससे आर्थिक हानि साथ-साथ शारिक हानि होती है एवं शरीर में बीमारियों का घर बन जाता है। अल्प आयु में मृत्यु का कारण बनता है। इसलिए हमें व्यसन से बिल्कुल दूर रहना है।
उन्होंने कहा कि भोग रोग का कारण है हमें विवेकपूर्ण भोजन करना है। सबसे ज्यादा विषय भोग जीव के द्वारा होता है। माताजी ने कहा कि रविवार 11 तारीख को मुकुट सप्तमी 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ का निवार्ण दिवस है। हमें बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाना है। उस दिन प्रातः मंदिरजी में विशेष शांति धारा अभिषेक के बाद पंडाल में सामूहिक रूप से शांति धारा होगी। शांति धारा के बाद सम्मेद शिखर विधान का आयोजन होगा। 72 पात्रों द्वारा बड़े भक्ति भाव से वाध्य यंत्रों की मधुर स्वर लहरों के साथ माता जी के द्वारा अर्घ्य उच्चारण द्वारा श्रद्धालुओं द्वारा अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। जिसमें विधानाचार्य रमेश चंद्र गांधी, अभिषेक शास्त्री सागर के दिशा निर्देशन में विधान का आयोजन होगा।
विधान के द्रव्य पुण्यार्जक का सौभाग्य गांधी किरीट कुमार जयंतीलाल बांसवाड़ा को प्राप्त हुआ। आज प्रवचन के दौरान अरथूना नगर से जैन पाठशाला के सो बालक बालिकाओं द्वारा एवं उनके साथ पधारे यतेंद्र द्वारा माता जी के दर्शन किए एवं श्रीफल भेंट किया गया। इस अवसर पर चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष निलेश जैन, राजेंद्र गांधी, नरेश जैन, जयंतीलाल जैन, आशीष पंचोली द्वारा सबका स्वागत अभिनंदन किया गया।













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