आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के मंगल विहार में रामगंजमंडी के भक्तों ने भीषण शीत लहर के बावजूद अद्भुत समर्पण दिखाया। बच्चों, महिलाओं और युवाओं की बड़ी संख्या गुरुदेव के साथ पैदल विहार में शामिल हुई। यह विहार श्रद्धा, आस्था और इतिहास का अनूठा उदाहरण बन गया। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट…
रामगंजमंडी। नगर में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज का वर्षायोग इस वर्ष अत्यंत ऐतिहासिक और अविस्मरणीय सिद्ध हुआ। गुरुवर एवं उनके विशाल संत संघ के प्रति नगरवासियों का समर्पण असाधारण रहा। श्रद्धा का ऐसा दृश्य कम ही देखने को मिलता है, जब भीषण शीत लहर के बीच गुरुदेव का विहार कोटा की ओर प्रातः बेला में प्रारंभ हुआ।
गुरुदेव के विहार से पूर्व ही 50 से अधिक युवक, महिलाएँ और बच्चे उनके समीप पहुँच गए और जयघोष करते हुए पैदल विहार में शामिल हो गए। ठंड की तीव्रता इतनी थी कि सामान्य जन बाहर निकलने से भी परहेज करते, किंतु भक्तों की आस्था ने मौसम को भी परास्त कर दिया। छोटे-छोटे बच्चे नंगे पैर गुरुदेव के साथ चलते दिखाई दिए, जो अपने आप में भक्ति का अनुपम उदाहरण है।
मन्ना लाल गुर्जर की फैक्ट्री पर गुरुदेव की मंगल आहारचर्या संपन्न हुई। इसके पश्चात मुकुंदरा दरा के सघन जंगलों के बीच हुआ यह विहार आध्यात्मिक ऊर्जा, निर्मोहिता और दिगम्बरत्व की साधना का जीवंत स्वरूप बन गया। ठंड से कंपकंपाती सुबह में दिगंबर संतों का निर्भीक विहार यह सिद्ध करता है कि साधना ही उनका वास्तविक आभूषण है।
यह मंगल विहार इस बात का भी प्रमाण बना कि गुरुदेव ने बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों – हर वर्ग को धर्म से जोड़कर रखा है। विहार के दौरान ‘साधना के रास्ते कामना के वास्ते, मुक्ति की मंज़िल मिले…’ जैसे प्रेरक वाक्य आत्मा को आलोकित करते दिखे। रामगंजमंडी की यह घटना जैन समाज के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में सदैव दर्ज रहेगी।













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