रामगंजमंडी में आचार्य विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में आयोजित बाल संगोष्ठी में 50 से अधिक बच्चों ने धार्मिक अनुभव और जीवन मूल्यों को अलौकिक शब्दों में अभिव्यक्त किया। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट…
रामगंजमंडी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में रविवार को भव्य बाल संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें लगभग 50 से अधिक बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ अपने मन की बात प्रस्तुत की। बच्चों ने बताया कि पाठशाला में उन्हें केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि गहन धार्मिक संस्कार प्राप्त हुए, जिनसे उनका जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुनि श्री 108 प्रांजल सागर महाराज के निर्देशन में संचालित इस कार्यक्रम का कुशल संचालन अदिति काला और सयानी विनायका द्वारा किया गया। बच्चों ने कहा कि अनुशासन मानव चरित्र की नींव है तथा आहार विधान, अभिषेक और तीर्थ यात्रा जैसे आध्यात्मिक संस्कारों का अनुभव जीवन को बदल देता है। एक बालक ने भावुक स्वर में कहा — “प्रथम बार अभिषेक करते समय मुझे अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति हुई।”
मस्ती खूब करो, पर माता-पिता की आज्ञा जरूर मानो
कार्यक्रम के प्रायोजक प्रेमलता महेश एवं नमिता कटारिया रहे, जिन्हें आचार्य श्री के पादप्रक्षालन का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। अपने प्रेरक प्रवचन में आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि माता-पिता की आज्ञा मानना ही जीवन उत्थान का पहला सूत्र है। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया — “मस्ती खूब करो, पर माता-पिता की आज्ञा जरूर मानो, और अपने मूलनायक भगवान शांतिनाथ को कभी मत भूलो।”
बाल प्रतिभा की उज्ज्वल प्रस्तुति ने किया प्रभावित
समारोह के दौरान बाल प्रतिभा की उज्ज्वल प्रस्तुति ने समाज को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान समाज संरक्षक अजीत सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा किया गया। अंत में संरक्षक अजीत सेठी ने सभी का आभार व्यक्त किया और प्रतिभाशाली बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए।













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