रामगंजमंडी में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय दाम्पत्य सेमिनार का शुभारंभ हुआ। इसमें मुनि श्री प्रांजल सागर जी और मुनि श्री प्रत्यक्ष सागर जी सहित कई वक्ताओं ने दांपत्य जीवन, परिवार, संस्कार और समाज में धर्म की भूमिका पर विशेष मार्गदर्शन दिया। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट…
रामगंजमंडी के श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय दाम्पत्य सेमिनार का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य श्री 108 विराग सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई, जिसे संरक्षक अजीत सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया, उपाध्यक्ष कमल लुहाड़िया और मंत्री राजीव बाकलीवाल ने संपन्न किया।
मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज के श्रीमुख से प्रार्थना हुई, जिसके बाद जानी-मानी मोटिवेशनल स्पीकर सुधा चौधरी ने मंच संचालन किया। उन्होंने माता-पिता और संतान के रिश्ते पर भावुक संदेश दिए और कहा कि सच्ची भक्ति वही है जब संतान भगवान के बाद माता-पिता के चरणों में झुके।
मुनि श्री प्रांजल सागर महाराज ने कहा कि दंपत्ति जीवन का आधार विश्वास और साथ है। पति-पत्नी को हर परिस्थिति में साथ रहना चाहिए, भ्रूण हत्या जैसे पापों से बचना चाहिए और संतान का पालन-पोषण संस्कारपूर्वक करना चाहिए।
‘मैं’ की भावना छोड़कर ‘हम’ की भावना अपनाने का संदेश
आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने अपने प्रवचन में अहंकार और ‘मैं’ की भावना छोड़कर ‘हम’ की भावना अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परिवार को जोड़कर चलना ही जीवन का सार है। उन्होंने एकल परिवार प्रणाली को चिंताजनक बताया और कहा कि संयुक्त परिवार में ही धर्म, ध्यान और संस्कार संभव हैं। उन्होंने समझाया कि माता-पिता यदि बच्चों को समय से पहले बड़ा कर देते हैं, तो यह उनके जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। बच्चों पर संस्कार डालना, परिवार को जोड़कर रखना और संतुष्टि का भाव ही सुखी जीवन का आधार है। इस अवसर पर युवा आदर्श जैन, आदिश जैन, आशीष जैन और नानू भैया ने सक्रिय सहयोग दिया।













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