टोंक में 3 नवंबर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ के सानिध्य में पीछी परिवर्तन समारोह आयोजित होगा। इसके बाद 7 से 12 नवंबर तक पंच कल्याणक महोत्सव संपन्न होगा। आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज द्वारा दीक्षा प्राप्त साधु-आर्यिका एवं समाज की सहभागिता से यह आयोजन होगा। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
आत्मा पर कर्मों के आश्रव से संसार में परिभ्रमण होता है, और संयम तथा दीक्षा अपनाना ही सही मार्ग है। आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज ने बताया कि मुनि अवस्था में उन्हें श्री महावीर स्वामी के दर्शन प्राप्त हुए। द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी की अनायास समाधि के बाद, आचार्य श्री धर्म सागर जी तृतीय पट्टाधीश नियुक्त हुए और 24 फरवरी 1969 को 11 व्यक्तियों को दिगंबर दीक्षा दी गई।
आचार्य श्री धर्म सागर जी ने अनेक नगरों में दीक्षाएं दी और सन 1987 में सीकर में अघोषित संलेखना के दौरान साधु जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने सदैव जैन समाज के हितों की रक्षा की और समाधि स्थल के नवीनीकरण की प्रेरणा दी।
टोंक नगर में 7 से 12 नवंबर तक पंच कल्याणक प्रतिष्ठा का आयोजन किया जाएगा। आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ के सानिध्य में श्रेष्ठी श्री मोहनलालजी जैन पुना छामुनिया को “वात्सल्यभक्त” की उपाधि से सम्मानित किया गया।
पंचकल्याणक समिति के पदाधिकारियों ने सम्पूर्ण जैन समाज को कार्यक्रम में सादर आमंत्रित किया। 3 नवंबर को श्री आदिनाथ नसिया में 34 साधुओं के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा पीछी परिवर्तन किया जाएगा।













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