टोंक में 15 अगस्त के अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने तिरंगे के रंगों और अशोक चक्र के माध्यम से देशभक्ति और आध्यात्मिकता का संदेश दिया। उन्होंने स्वतंत्रता के महत्व, जैन धर्म के योगदान और व्यसन व आधुनिक शिक्षा पर विचार साझा किए। पढ़िए राजेश पंचोलिया की ख़ास रिपोर्ट…
टोंक में 15 अगस्त के विशेष अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित विराजित रहे। उन्होंने अपनी मंगलदेशना में स्वतंत्रता को जन्मसिद्ध अधिकार बताया और देशभक्ति के महत्व पर जोर दिया। आचार्य जी ने बताया कि तिरंगे में केसरिया रंग सत्य धर्म का, सफेद रंग अहिंसा और शांति का, हरा रंग प्रसन्नता और हरियाली का प्रतीक है, जबकि अशोक चक्र की 24 रेखाएं जैन 24 तीर्थंकरों के धर्म प्रवर्तन का संकेत हैं।
आचार्य श्री ने यह भी कहा कि जैन समाज ने भारत की आजादी में तन, मन और धन से योगदान दिया, लेकिन आज हमारे मंदिर और सिद्धक्षेत्र परतंत्र होते जा रहे हैं। उन्होंने व्यसन, राजनीति में धर्म व सिद्धांत की कमी और शिक्षा प्रणाली में नैतिकता की गिरावट पर चिंता जताई।
पंडाल तिरंगे और गुब्बारों से सजाया
धर्मसभा में अभिषेक, पूजन और जिनवाणी भेंट का आयोजन हुआ। संपूर्ण पंडाल तिरंगे और गुब्बारों से सजाया गया। आचार्य श्री के प्रवचन से पहले आर्यिका श्री देशना मति ने भी उपस्थित लोगों को मार्गदर्शन दिया। दोपहर में नगर के शिक्षकों के अधिवेशन में आचार्य श्री संघ सानिध्य में उपस्थित रहे, जहाँ विभिन्न विषयों पर चर्चा और विचार विमर्श हुआ।













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