24 नवंबर को मंगल विहार के दौरान आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने देव-शास्त्र-गुरु के सानिध्य और दर्शन-पूजन के महान महत्व पर प्रेरणादायक देशना दी। 25 नवंबर को संघ सहित पीपलदा में उनका भव्य मंगल प्रवेश होने जा रहा है, जिसे लेकर समाज में उत्साह है। श्रीफल साथी राजेश पंचोलिया, इंदौर
पीपलदा । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित 25 नवंबर को पीपलदा में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे। समाज में उत्साह चरम पर है और पूरे नगर में आध्यात्मिक वातावरण बन चुका है।
धर्मसभा में प्रेरणा — दर्शन, पूजन और पुण्य का महत्व
24 नवंबर की धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा —
“मनुष्य की दिनचर्या भगवान के दर्शन-अभिषेक से शुरू होनी चाहिए। पुण्य उदय से ही देव-शास्त्र-गुरु का सानिध्य मिलता है। जैसे कर्म करेंगे, वैसा फल इसी भव और अगले भव में प्राप्त होगा।”
भगवान के दर्शन कैसे करें — विशेष मार्गदर्शन
प्रवचन में बताया गया कि —
भगवान के दर्शन नेत्र खोलकर, पंचांग नमस्कार के साथ — दोनों हाथ, मस्तक और पैर भूमि पर रखकर तीन बार मन, वचन और काय की अनुमोदना के साथ करने चाहिए।
श्रद्धा और भक्ति से दर्शन करने से रोग भी शांत होते हैं और मन को स्थिरता मिलती है।
पूजन से कषाय शांत
आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि पूजन, स्वाध्याय और धार्मिक क्रिया के दौरान क्रोध और लोभ जैसी कषाय मन से गायब हो जाती हैं। धर्म से जुड़कर मनुष्य पाप और आसक्ति से दूर रहता है।
मंगल विहार — भक्तिभाव से भरा माहौल
24 नवंबर को दोपहर में आचार्य श्री ,मुनि श्री हितेंद्रसागर, मुनि श्री चिंतनसागर, मुनि श्री भुवनसागर, आर्यिका विन्रम मति, आर्यिका प्रणतमति और आर्यिका निर्मोहमति माताजी सहित 6.7 किलोमीटर विहार कर पीपलदा रोड पहुँचें। रात्रि विश्राम बत्तीलाल मीणा के निवास के पास हुआ।
25 नवंबर — इंतजार अब खत्म
25 नवंबर को सुबह 3 किलोमीटर मंगल विहार के बाद
1008 श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, पीपलदा में भव्य मंगल प्रवेश होगा।
समाज उत्साह से भर चुका है —
दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष बजरंग लाल महाजन, रमेश चंद सिंघल, लल्लू प्रसाद सहित पंचकल्याणक समिति के पदाधिकारी और अनेक इंद्र परिवार चरण प्रक्षालन, मंगल आरती और अभिनंदन करेंगे।













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