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आचार्य वर्धमान सागरजी ने कहा-भगवान और गुरु के दर्शन विनय पूर्वक करें : 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ 


नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। टोंक से पढ़िए, यह खबर…


टोंक। नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। केवलचंद कल्ली वाले, ज्ञान भरनी वाले, पारसमल बगड़ी वाले ने बताया कि शनिवार को जिनालय में जल, शर्करा, नारियल पानी, विभिन्न फलों के रस, धी, दूध, दही, केशर सर्वऔषधि, लाल सफेद चंदन, हल्दी पुष्प मंगल आरती, सुगंधित जल एवं शांतिधारा विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की संघस्थ शिष्या 70 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी की संयम समाधि साधना निरंतर एकांतर एक आहार एक उपवास से साथ चल रही है। आहार में भी सीमित मात्र मनुक्का जल, दूध और पानी ही ले रही हैं। दूध के अतिरिक्त अन्य 5 रसों ,सभी अनाज सहित काफी खाद्य सामग्री का त्याग कर दिया हैं।

जब बच्चा संसार में जन्म लेता है तब दुनिया हंसती है

राजेश पंचोलिया और गजराज लोकेश ने बताया कि संत भवन में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने उपस्थित श्रावकों से कहा कि हमें दुनिया में जो कुछ भी प्राप्त होता है। वह हमारे पुण्य कर्मों से होता है। मनुष्य जीवन भी हमें अपने पुण्य कर्मों से ही मिला है। दुनिया में हम जैसा कर्म करेंगे। वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा। कहते भी हैं जैसी करनी वैसी भरनी। जब बच्चा संसार में जन्म लेता है तब दुनिया हंसती है और बच्चा रोता है। हमें दुनिया में आने के बाद ऐसे कर्म करने हैं कि जब हम हमारी आयु पूर्ण कर दुनिया से जाएं तो हमारे जाने के दुख में सारी दुनिया रोए। इसके लिए जरूरी है कि हमारे कर्म अच्छे होने चाहिए। हमारे जैसे गुरु होंगे हमें शिक्षा भी वैसी ही मिलेगी। अच्छे गुरु की संगत हमें अच्छे कर्म करवाएगी।

प्रभु सब की प्रार्थना स्वीकार करते हैं 

हमारे अच्छे कर्म और पुण्यों के कारण से ही हम लोगों के दिलों में जगह बना सकते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि जब भी आप गुरु या भगवान के पास जाएं तो उनके सामने विनम्रता पूर्वक दर्शन करे। हर आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति होती है। बस जरूरत है साधना और तपोबल की। प्रभु के सामने जो भी प्रार्थना करता है। प्रभु सब की प्रार्थना स्वीकार करते हैं लेकिन, जरूरी नहीं जो आप मांग रहे हैं। वह सब आपको प्रभु प्रदान कर दे। जो भी आपको मिलना है वह आपके पुण्य कर्म के आधार पर ही मिलना है। अगर हमें अपने जीवन की दशा सुधारनी है तो हमें दिशा बदलनी पड़ेगी। राग, द्वेष, मोह ,माया और जीवन के कषायों को छोड़कर अपनी दिशा बदलोगे तो आपके जीवन के दशा अपने आप बदल जाएगी। प्रभु के पास जब भी आप जाएं उन से विनती करें प्रार्थना करें कि हे प्रभु जैसे आप हैं मुझे भी वैसा ही बनना है। ऐसा बनने के लिए मुझे पुरुषार्थ करने की शक्ति प्रदान करें।

आचार्यश्री की आहारचर्या हुई 

आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की आहार चर्या केवलचंद, लोकेश गजराज कलई परिवार टोंक ओर समर, सनत राजेश पंचोलिया इंदौर के चौके में हुई। पारसमल फूलेता परिवार पुण्यार्जक के निवास से जुलूस आकर शाम को श्रीजी ओर आचार्य श्री आरती हुई। शाम को छहढाला की कक्षा में सभी उम्र के समाज जन शामिल होते हैं।

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