आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का 12 जून को नगर में भव्य मंगल प्रवेश होगा। इस जानकारी से समाजजनों में खुशी लहर व्याप्त है। विदिशा से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
विदिशा। आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का 12 जून को नगर में भव्य मंगल प्रवेश होगा। इस जानकारी से समाजजनों में खुशी लहर व्याप्त है। इस दौरान मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि भोग क्या है? सुख की इच्छा, स्वाद की लालसा, दिखावे की दौड़ यही तो भोग हैं और भोग का स्वभाव कैसा है? ठीक वैसे ही जैसे अग्नि का। जैसे अग्नि में लकड़ी डालते जाएं, वो बुझती नहीं और भड़कती जाती है। वैसे ही, भोग की इच्छाएं पूरी करने से खत्म नहीं होतीं बल्कि और तेज़ हो जाती हैं।
मुनिश्री ने आगे कहा कि आज एक चीज चाहिए, कल दो, फिर चार। यह लालसा रुकती नहीं बढ़ती जाती है। भोग को भोगने से नहीं, रोकने से शांति मिलती है। जो इंसान अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखता है, वही असली सुखी है। संयम ही वह दीपक है, जो भीतर की अंधकार को मिटाता है। तो आइए, हम सब अपने जीवन में थोड़ा ठहरें, थोड़ा छोड़ें, थोड़ा संयम अपनाएं क्योंकि, सच्चा आनंद बाहर नहीं, भीतर है।













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