इंदौर के इतिहास में पहली बार विशाल पट्टाचार्य महोत्सव होने जा रहा है। 27 अप्रैल से आरंभ होकर यह पांच दिवसीय कार्यक्रम 2 मई को पूर्ण होगा। इसमें देशभर के करीब 450 साधु-संत, साध्वियां और करीब 15 लाख श्रद्धालुुगण शामिल होंगे। इसके लिए तैयारियां की जा रही है। व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। इंदौर से पढ़िए टीके वेद की यह खबर…
इंदौर। आचार्यश्री आदिसागर जी महाराज की परंपरा में आचार्य श्री महावीर कीर्ति जी महाराज, आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज, आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज हुए। 3 जून 2024 को जालना महाराष्ट्र में पूर्ण चैतन्य अवस्था में आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज ने अपने शिष्य आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के लिए यह कहा कि हम चाहते हैं कि विशुद्धसागर जी महाराज का अपनी निःस्वार्थ भावना से, साधुओं में बिना राग द्वेष, प्रेम, वात्सल्य के साथ सभी का यथोचित ध्यान रखें। चर्या सभी श्रेष्ठ हों। बिना किसी जल्दबाजी के यह कार्यक्रम लगभग एक वर्ष बाद किया जा रहा है। इंदौर एवं जैन समाज में वात्सल्य और सेवा का कीर्तिमान बनाने वाले श्रेष्ठ श्रावक दंपत्ति ने स्व प्रेरणा से यह कार्यक्रम करने की भावना व्यक्त की। जिसे आचार्यश्री ने सहज स्वीकार कर यह दायित्व मनीष सपना गोधा गांधीनगर इंदौर को सौंपा। तभी से इस महोत्सव की तैयारियां की जा रही है तथा मनीष सपना गोधा दंपत्ति ने पूरे भारत वर्ष के सभी प्रमुख आचार्यों, श्रमणों को लगभग दो माह भ्रमण कर व्यक्तिगत निवेदन किया। इसमें देश भर के सभी संघों को बिना किसी भेदभाव के आमंत्रित किया गया। इसकी जो आमंत्रण पत्रिका बनी वह भी अविस्मरणीय और संग्रहणीय हो गई है। यह तय है कि समूचे भारत के इतिहास में इतने श्रमण और साध्वियां इसके पूर्व कभी एकत्रित नहीं हुए। लगभग 450 पिच्छी की उपस्थिति संभावित है।
विशाल पांडाल में 25 हजार एक साथ बैठ सकेंगे
इस कार्यक्रम के लिए जो मुख्य पांडाल बना है। उसे देशना मंडपम नाम दिया गया है। यह पूर्णतः वातानुकूलित होगा। इसमें एक साथ 25 हजार व्यक्तियों की बैठने की व्यवस्था रहेगी। श्रावकों के लिए 4 वातानुकूलित भोजनशाला होंगी। इसमें वीआइपी, सामान्य श्रावक, त्यागी वृत्ति, सोले के भोजन की अलग-अलग व्यवस्था रहेगी। श्रमणों और साध्वियों के लिए लगभग 400 चौकों की व्यवस्था की गई है। इच्छुक श्रावकों को ये चौके दिए गए है। अशुद्धि में जो माताजी रहेंगी, उनके लिए प्रथक व्यवस्था की गई हैं।
सभी की ठहरने की अलग-अलग रहेगी व्यवस्था
लगभग 40 एकड़ का विशाल पार्किंग होगा और 200 एकड़ भूमि में यह पूर्ण कार्यक्रम होगा। महोत्सव स्थल पर देश भी सभी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं के वरिष्ठों को आमंत्रित किया गया है तथा उनके लिए पूर्ण व्यवस्थाएं की गई हैं। आचार्यो को सौभाग्य सदन में, मुनिसंघ आचार्य विमलसागर भवन में, आर्यिका माताजी आचार्य विराग सागर भवन में ठहरेंगे। इसके अलावा आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के प्रकाशित ग्रंथों की भव्य प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। साथ ही बाल संस्कार शिविर, प्लेजोन, इमर्सिव जोन, समवशरण की रचना आदि भी रहेगी। प्रोजेक्शन मेपिंग के माध्यम से जैन आगम की सुंदर कहानियां, आदिनाथ गाथा, महावीर गाथा, सम्राट खारवेल गाथा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आधुनिक लेजर शो, ड्रोन शो भी दिखाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय व्यक्ति प्राप्त स्वस्ति मेहुल जैन की भजन संध्या भी रखी गई है। इन कलाकारो की ख्याति इसलिए भी है कि देश के विश्वस्तरीय कार्यक्रम में यह अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।
कार्यक्रम इस प्रकार रहेंगे
27 अप्रैल को सुबह 6 बजे महावीर बाग से सुमतिधाम मंगल प्रवेश, सुबह 9 बजे प्रवचन देशना मंडपम में, आहारचर्या, सुबह 10.30 बजे, स्वाध्याय दोपहर 2.30बजे वात्सल्य मंडपम में, आचार्य भक्ति शाम 6 बजे आरती मंडपम में, आरती शाम 7.30 बजे आरती मंडपम में, प्रेजेक्शन मेपिंग 8 बजे आरती मंडपम में, लेजर शो, 8.30 बजे, सांस्कृतिक कार्यक्रम 9 बजे देशना मंडपम में होंगे। प्रोजेक्शन मेपिंग रात 11 बजे आरती मंडपम में होंगे। यह कार्यक्रम प्रतिदिन होंगे। इसके अलावा विशेष कार्यक्रमों में 27 अप्रैल को पत्रकार सम्मेलन, 28 अप्रैल को पूत्य गणाचार्य जी का पूजन, 29 अप्रैल को पूज्य आचार्यों को शास्त्र, सिंहासन और कमंडल भेंट, 30 अप्रैल को पट्टाचार्य महोत्सव, 1 मई को राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा 2 मई को पूज्य गणाचार्य का जन्म जयंती समारोह किया जाएगा। इसके अलावा प्रतिदिन दोपहर में एक-एक सामाजिक संस्थाओं का गुरुदेव के सामने चर्चा, प्रतिनिधियों की सभा होगी। प्रवेश रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही होगा। अभी तक लगभग 80 हजार लोग पंजीयन करवा चुके हैं। पांच दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 15 लाख लोग शामिल होंगे।













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