संयम का साधन, सम्यक ज्ञान का प्रतीक पिच्छी अहिंसात्मक होती है। इसे धारण करने वाला संयम, ज्ञान और स्वाध्याय के माध्यम से मोक्ष मार्ग पर चल पड़ता है। यह उद्गार आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने विजयनगर स्थित पंच बालयति मंदिर परिसर में आयोजित पिच्छी परिवर्तन समारोह में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं के बीच कही। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। संयम का साधन, सम्यक ज्ञान का प्रतीक पिच्छी अहिंसात्मक होती है। इसे धारण करने वाला संयम, ज्ञान और स्वाध्याय के माध्यम से मोक्ष मार्ग पर चल पड़ता है। यह उद्गार आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज ने विजयनगर स्थित पंच बालयति मंदिर परिसर में आयोजित पिच्छी परिवर्तन समारोह में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं के बीच कही। मंगलवार को आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज का पिच्छी परिवर्तन समारोह विजय नगर स्थित पंचबालयति मंदिर में आयोजित किया गया। आचार्यश्री को पिच्छी प्रदान करने के उपरांत पुरानी पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य हर्ष तृप्ति जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मीडिया प्रभारी प्रवीण जैन ने बताया कि आचार्यश्री ने इस अवसर पर पिच्छी का महत्व बताते हुए कहा कि मुनिराजों के उपयोग में आने वाली यह पिच्छी अहिंसात्मक होती है।
कार्यक्रम में विकास विनिता जैन, सारा जैन, डीके जैन, नवीन गोधा, आकाश जैन, अशोक डोसी आदि उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन, संगीतमय भजनों की प्रस्तुति आदि के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर पूर्वाचार्यों को भी याद किया गया। उन्हें नमोस्तु प्रस्तुत किया गया। समाजजनों ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट किए।













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