समाचार

आचार्य श्री विद्यासागर का 56वां दीक्षा दिवस 30 जून को : विचारों को विश्व व्यापी बनाने की आवश्यकता


भारत को भारत बनाने की परिकल्पना करने वाले एक महान राष्ट्र चिंतक, आध्यात्म योगी भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं और असहनीय पीड़ा के बीच हम उनका 56वां दीक्षा दिवस महोत्सव मना रहे हैं। 56 वर्ष पूर्व भारत के राजस्थान प्रांत के अजमेर नगर में एक आध्यात्म योगी रूपी जौहरी ने एक हीरे की पहचान की और उस हीरे को तराशने का काम शुरू किया और मात्र कुछ ही समय में उस हीरे का प्रकाश चारों ओर फैलने लगा। पढ़िए ओम पाटोदी की रिपोर्ट…


इंदौर। भारत को भारत बनाने की परिकल्पना करने वाले एक महान राष्ट्र चिंतक, आध्यात्म योगी भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं और असहनीय पीड़ा के बीच हम उनका 56वां दीक्षा दिवस महोत्सव मना रहे हैं। 56 वर्ष पूर्व भारत के राजस्थान प्रांत के अजमेर नगर में एक आध्यात्म योगी रूपी जौहरी ने एक हीरे की पहचान की और उस हीरे को तराशने का काम शुरू किया और मात्र कुछ ही समय में उस हीरे का प्रकाश चारों ओर फैलने लगा। यह पत्थर कोई सामान्य पत्थर नहीं था क्योंकि उस पत्थर में एक स्वर्णिम आभा छुपी हुई थी जिसे ज्ञान गुरु में तराशा एवं उस आभा को बाहर लाने का उपक्रम किया। हां, यहां हम आचार्य ज्ञान सागर जी के शिष्य समाधिस्थ मुनिश्री विद्यासागर जी की ही बात कर रहे हैं। जब ज्ञान गुरु ने विद्याधर रूपी पत्थर को तराश कर मुनि विद्यासागर के रूप में जन समूह के सामने प्रस्तुत किया।

भक्तों के साथ शिष्यों की भी जिम्मेदारी

वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि 30 जून रविवार को भारतीय संस्कृति के महान संत आध्यात्म योगी आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनि राज का 56 दीक्षा दिवस है। यह बात अलग है कि इस दीक्षा दिवस पर पहली बार वह महान संत भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं होंगे परंतु उनका 56 वर्षों का जीवन दर्शन हमारे मन के हर अन्धकार को प्रकाशमान करने में सक्षम है। बात सिर्फ उनकी अदृश्य छवि को अंतर्मन में महसूस करने भर की है। उनके संयमित जीवन रूपी किताब का हर एक पन्ना हमारे संशय एवं शंकाओं को दूर करने वाला है। अपने संयमित जीवन के साथ आचार्य महाराज में जो चिंतन प्रस्तुत किया वह सिर्फ आध्यात्मिक चेतना को जगाने वाला ही नहीं है बल्कि देश की हर समस्या का समाधान प्रस्तुत करने वाला है फिर चाहे वह समस्या राजनीतिक हो या आर्थिक। सामाजिक हो या पारिवारिक। खान पान की हो या स्वास्थ्य संबंधी। शैक्षणिक हो या पर्यावरणीय ऐसे ही हर एक संवेदनशील मुद्दों पर आचार्य श्री ने अपने सटीक विचार व्यक्त किए और सिर्फ विचार ही व्यक्त नहीं किया उसे सामाजिक जीवन में अंगीकार करवाया और भक्तों को उससे जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया है। आज जब वह महान आत्मा भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं है तो हम सब लोगों की यह जवाब देहि बन जाती है कि हम उनके चिंतन को आत्मसात करने का और करवाने का महत्वपूर्ण कार्य करें। जिससे उनके जीवन के स्वर्णिम प्रकाश से संपूर्ण विश्व लाभान्वित हो सके। जिततनी जवाब देही उनके भक्तों की है उससे भी कहीं ज्यादा जवाबदारी उनके उन महान शिष्यों की है क्योंकि उनके हर एक शिष्य में यह काबिलियत है कि वह उनके चिंतन को विश्व व्यापी बना सके।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page