शीतकालीन प्रवास के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का रविवार दोपहर 1 बजे भव्य मंगल प्रवेश हुआ। संतों की अगवानी के लिए सुबह 8 बजे से ही टोंक जिले और आसपास से श्रावक पहुंचना शुरू हो गए।निवाई से पढ़िए, यह खबर…
निवाई। कई जन्मों का पुण्य उदय जब जीवन में आता है तब जाकर एक साथ ऐसे दिगंबर जैन संतों का दर्शन सानिध्य मिल पाता है। यह बात एकदम सत्य है जीवन में सबकुछ संभव है परंतु, संतों का संगम सानिध्य मिलना महा दुर्लभ है। धरती बिछौना है, आसमान ओढ़ना है और संयम, तप, त्याग ही जिनका ग़हना है। पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार कोटा का ये कहना है। जीवन में इनके चरणों में ही रहना है। जिसका हमें था इंतजार, जिसके लिए था मन बेकरार। वो घड़ी आ गईं-आ गई। जी हां, शीतकालीन प्रवास के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का रविवार दोपहर 1 बजे भव्य मंगल प्रवेश हुआ। संतों की अगवानी के लिए सुबह 8 बजे से ही टोंक जिले और आसपास से श्रावक पहुंचना शुरू हो गए। आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज का 3 साल बाद यहां शीतकालीन प्रवास के लिए आगमन हुआ है।
आचार्य श्री के मंगल प्रवेश को लेकर श्रावकों में अपार उत्साह देखा गया। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला एवं राकेश संधी ने बताया कि निवाई की सीमा पर जैन समाज की कमेटी एवं श्रावक जनों ने अगवानी की। यहां से श्रावक नाचते-गाते जैन धर्म और गुरुदेव की जयकार लगाते हुए श्री शांतिनाथ अग्रवाल मंदिर की तरफ बढ़े। ‘गुरुवर आज मेरी कुटिया में आए हैं आओ बाबा पधारो बाबा’ जैसे भजनों से चारों तरफ अध्यात्म बिखर गया। यहां से सभी संत श्री शांतिनाथ अग्रवाल मंदिर पहुंचे जहां से उन्हें विशाल शोभायात्रा के रूप में नसिया मंदिर तक ले जाया गया। शोभायात्रा से पूर्व अग्रवाल मंदिर में आचार्य श्री के शिष्य मुनि प्रभव सागर महाराज सहित सभी 26 साधुओं ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की भव्य अगवानी की। 28 दिन दूर रहने के बाद सभी साधुओं ने भाव विभोर होकर आचार्य श्री के दर्शन किए। इस दृश्य को देखकर वहां उपस्थित सभी श्रावक भाव विभोर हो उठे। अग्रवाल मंदिर पर बनाए गए मंच पर आचार्य श्री के सभी शिष्यों ने आचार्य वर्धमान सागर महाराज का पाद पक्षालन किया। इसके बाद गाजे बाजे के साथ विशाल शोभायात्रा रवाना हुई।
शोभायात्रा में उमड़ा धार्मिक उल्लास
शोभायात्रा में सर्वप्रथम घोड़े पर युवक जैन ध्वज लेकर चल रहे थे पीछे प्रथम ऐरावत हाथी पर पाद प्रक्षालन कर्ता श्रेष्ठी जितेंद्र कुमार गजेंद्र कुमार जैन चवरियां परिवार बैठे हुए चल रहा था। दूसरे ऐरावत हाथी पर शास्त्र भेंट कर्ता श्रेष्ठी नेमीचंद संजयकुमार जैन सिरस जिनवाणी लेकर चल रहे थे। तीसरे ऐरावत हाथी पर चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन कर्ता दामोदर प्रसाद, हनुमान प्रसाद, गिर्राज प्रसाद जैन आचार्य शांति सागर महाराज की तस्वीर लेकर चल रहे थे। जैन समाज के मीडिया प्रभारी विमल जौंला एवं राकेश संघी ने निवाई का सोनम डीजे बैंड अपने मधुर भजनों की धुन बजाता हुआ चल रहा था। पीछे महिला मंडल जैन ध्वज लेकर जयकारा लगाते हुए चल रही थी। इसके बाद नैनवा से आया बैंड जैन भजनों पर युवक भक्ति नृत्य के साथ झुमते हुए चल रहे थे। साथ में महिला मंडल अपनी ड्रेस कोड में साफा लगाते हुए चल रही थी। अंत में किशनगढ़ से आया आर के बैंड आचार्य श्री के साथ अपने भजनों की मधुर ध्वनि के साथ धुन बजाता हुआ चल रहा था। जिस पर सभी युवक आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज के जयकारे लगाते हुए झूमते हुए भक्ति नृत्य के साथ चल रहे थे।
जयकारों से पूरा शहर गूंजायमान
आचार्य श्री की भक्ति में ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग से आकर देवलोक भक्ति कर रहे हो। निवाई शहर में रविवार को ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग धरती पर उतर चुका है। चारों ओर आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज की जयकारों से पूरा शहर का वातावरण गूंजायमान हो गया। जैनेतर लोग भी आचार्य श्री के दर्शनों के लिए आतुर थे। निवाई शहर के नगर पालिका अध्यक्ष अध्यक्ष दिलीप इसरानी राजेश चौधरी और रतन गुर्जर ने भी आचार्य श्री के श्रीफल चढाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि शोभा यात्रा का जुलूस अग्रवाल मंदिर से रवाना होकर भगवान महावीर मार्ग अहिंसा सर्किल होता हुआ बपूई वालों के चैत्यालय होता हुआ पाटनी काम्प्लेक्स के बहार बनाए गए मंच पर पूर्व मुख्य सचेतक महावीर प्रसाद जैन की धर्मपत्नी पिस्तोल देवी, जितेंद्र कुमार गजेंद्र कुमार जैन चवरियां परिवार द्वारा आचार्य श्री का चांदी की थालियों में रजत कलश से पाद प्रक्षालन किया गया। जिसे देखने निवाई शहर के जैन और जैनेतर सभी श्रद्धालु उमड़ पड़े। इसके बाद जुलूस बड़ा बाजार बड़ा जैन मंदिर बिचला जैन मंदिर होता हुआ जैन नसियां स्थित संत निवास पहुंचा।
यह समाजजन मौजूद रहे
इस अवसर पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि जब नगर में दिगंबर संत आते हैं तो वह नगर सोना-सोना हो जाता है, और जब दिगम्बर साधु जाते हैं तो वह नगर सूना-सूना हो जाता है। पारस जैन “पार्श्वमणि ने बताया कि इस अवसर पर महावीर प्रसाद पराणा दिनेश चंवरिया, हेमचंद संधी, महावीर प्रसाद माधोराजपुरा, विष्णु बोहरा, राजेन्द्र बगड़ी, अमित कटारिया, गोपी कासलीवाल, शिखरचंद काला, धर्मचंद चंवरिया, पारसमल पराणा, गोपाल कठमाणा, शंभु कठमाणा, चंद्र प्रकाश जौंला, त्रिलोक सिरस, पवन कंटान, नीटू छामुनिया, धर्मचंद सर्राफ, कमल सर्राफ, धर्मेंद्र पासरोटिया, राजेश सर्राफ, पवन गुप्ता, पदम जौंला, आदिश गंगवाल, चेतन गंगवाल, पदम टोंग्या विमल गिन्दोडी, पवन बड़ागांव, विमल सेदरिया सहित अनेक लोग मौजूद रहे।













Add Comment