आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का अनेक ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद टोंक नगर से शिवाड़ की ओर 32 साधु सहित शनिवार को विहार किया। प्रातः श्री आदिनाथ जिनालय में आचार्य संघ सान्निध्य में भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
टोंक। उड़ गया पंछी रे ,हरी-भरी डाल से, रोको ना रोको कोई गुरु को विहार से बैंड डीजे पर भजन गीत की पक्तियां सभी के नेत्रों को सजल कर रही थी। अनेक युवाओं महिलाओं के नेत्रों से आंसू बह रहे थे। प्रसंग था हजारों समाजजनों द्वारा अश्रुपूरित नेत्रों से राजस्थान के राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का चातुर्मास के बाद विदाई का। रमता जोगी, बहता पानी रोकने से भी नहीं रुकता है। वर्ष 2025 के वर्षायोग के बाद आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का अनेक ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद टोंक नगर से शिवाड़ की ओर 32 साधु सहित शनिवार को विहार किया। प्रातः श्री आदिनाथ जिनालय में आचार्य संघ सान्निध्य में भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। नगर से मंगल विहार के पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म देशना में बताया कि टोंक जिले में चातुर्मास किया था। अब टोंक में चातुर्मास संपन्न कर टोंक जिले में विहार करेंगे। संघ की भक्ति और श्रद्धा निरंतर बनी रहना चाहिए। 55 वर्ष पूर्व दीक्षागुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी द्वारा दिए गए संस्कारों में वृद्धि हुई है। कमेटी और समाज एक दूसरे के पूरक हैं। श्री आदिनाथ भगवान से लेकर महावीर स्वामी 24 तीर्थंकरों ने धर्म देशना दी है। छोटे-छोटे नियम व्रत से संयम वैराग्य का बड़ा वृक्ष बनता है छोटे नियम से बड़ा परमात्म पद मिलता है। मनुष्य जीवन कीमती है बार-बार नहीं मिलता है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का मुख्य सूत्र था। डरो मत, संयम धारण करो। इसलिए देव शास्त्र गुरु की भक्ति आराधना मिथ्यात्व को छोड़कर सम्यक दर्शन प्राप्त कर जीवन को सफल बनाना चाहिए।
ज्ञान रूपी अमृत जिनवाणी का स्वाध्याय रूपी पान करना चाहिए
पवन कंटान अनुसार आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने व्रत संयम, वैराग्य का महत्व बताकर सभी को नियम धारण करने की प्रेरणा दी। मुनिश्री ने प्रवचन में बताया कि में संयम को अंगीकार करना चाहिए। अंजुली में ज्ञान रूपी अमृत जिनवाणी का स्वाध्याय रूपी पान करना चाहिए। जीवन का कल्याण नियम धर्म में वृद्धि होने से होता है। गुरु से व्रत नियम लेना चाहिए। लक्ष्मी धन का उपयोग दो प्रकार से होता है। दान और भोग भोग से धन मिट्टी हो जाता है और दान देने से पुण्य मिलता है। 15 को लगभग 5 किमी विहार कर आहार चर्या सुनील बंसल के निर्माणाधीन भवन पर हुई। दोपहर को 3.3 किमी विहार कर रात्रि विश्राम बनास नदी के पास पॉलिटेक्निक कॉलेज में होगा।













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